Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

व्यवधान- सिद्धार्थ गोरखपुरी

व्यवधान व्यवधान अनेकों जीवन मेंरह-रह कर उपजा करते हैंहम मन को थोड़ा समझाते हैंऔर वक़्त से सुलहा करते हैं तनिक …


व्यवधान

व्यवधान- सिद्धार्थ गोरखपुरी

व्यवधान अनेकों जीवन में
रह-रह कर उपजा करते हैं
हम मन को थोड़ा समझाते हैं
और वक़्त से सुलहा करते हैं

तनिक सांस तो लेने दो
इम्तेहान पर इम्तेहान न लो
ऐ व्यवधानों तनिक ठहरो
रह-रह कर मेरी जान न लो

वे मशले भी उलझ जातें हैं
जो अक्सर सुलझा करते हैं
व्यवधान अनेकों जीवन में
रह-रह कर उपजा करते हैं

अक्सर गहरी रातों में
उलूल -जुलूल की बातों से
हम खुद से झगड़ा करते हैं
व्यवधान अनेकों जीवन में
रह-रह कर उपजा करते हैं

एक अरसे तक किस्मत देखी
किस्मत ने की हरदम अनदेखी
वक़्त हालात जब बदल गए
फिर तनहा -तनहा रहते हैं
व्यवधान अनेकों जीवन में
रह-रह कर उपजा करते हैं

काश मुझे भी चैन मिले
सुकून भरी एक रैन मिले
लम्बे दौर के बुरे दौर में
न जाने किस तरहा रहते हैं
व्यवधान अनेकों जीवन में
रह-रह कर उपजा करते हैं

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

Sakaratmak urja by Anita Sharma

September 4, 2021

 सकारात्मक ऊर्जा* हे मानुष तू न हो निराश। कर्म पथ पर बढ़ता चल  राह कठिन एकाकी होगी पर दायित्व संभाले

Sathi hath badhana by Anita Sharma

September 4, 2021

 *साथी हाथ बढ़ाना* साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थका हारा हो, साथ साथ बढ़ना उसके। हाथों को थामे रखना अपनो

Anath tere bin by Indu kumari

September 4, 2021

 श्री कृष्ण जन्मोत्सव   अनाथ तेरे बिन  आधी रात को जन्म भये कारावास का खुले वज्र कपाट दैत्य प्रहरी सो गए 

Sikhane ki koshish by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करें अपने बच्चों को खाना बनाना भी पढ़ाई के साथ-साथ, वरना  लाखों के

Nishkam karm by Anita Sharma

September 4, 2021

 निष्काम कर्म हम कर्म करें निषकर्म भाव से। हो सेवा निष्कर्म भावों की। न अपेक्षा रखे किसी से। न उपेक्षित

Barsaat ki ek rat by Anita Sharma

September 4, 2021

बरसात की एक रात   इक रात अमावस की थी,         बरसता था पानी। रह-रह कर दामिनी

Leave a Comment