व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं गंभीर …
Related Posts
कविता-पहले बुद्धू बनना पड़ेगा| pehle buddhu banna padega
November 13, 2022
कविता-पहले बुद्धू बनना पड़ेगा किसी से ज्ञान प्राप्त करना है तो अपना ज्ञानवर्धन कर आगे बढ़ना है तो किसी में
अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023 का आगाज़ – 5 दिसंबर 2022 को प्रीलॉन्च
November 13, 2022
भारत की गाथा अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023 का आगाज़ – 5 दिसंबर 2022 को प्रीलॉन्च मोटा अनाज पोषण तत्वों
व्यंग्य कविता-मेरे पास टाइम नहीं| I mere pas time nahi
November 13, 2022
व्यंग्य कविता-मेरे पास टाइम नहीं मेरे पास पचासों काम रहते है तुम्हारे समान खाली हूं क्या मैं बहुत बिजी रहता
अब न स्वांग रचो| Ab na swang racho
November 13, 2022
अब न स्वांग रचो| Ab na swang racho जो सच है वह सच है खुलकर इसको स्वीकार करो ,झूठ का
आओ देखें कोई भी मतदाता पीछे न छूटे|koi bhi matdata na chhute
November 13, 2022
मतदाता आओ देखें कोई भी मतदाता पीछे न छूटे मतपत्र के जबरदस्त बल के माध्यम से ताकत निर्बाध रूप से
माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं
November 13, 2022
किसी ने रोज़ा रखा किसी ने उपवास- कबूल उसका हुआ जिसने मां-बाप को रखा अपने पास माता-पिता और बुजुर्गों की

