व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं गंभीर …
Related Posts
झुकता वही है जिसमें रिश्तो की फ़िक्र होती है
December 25, 2022
गारी ही से उपजै, कलह कष्ट औ मीच। हारि चले सो सन्त है, लागि मरै सो नीच झुकता वही है
नए साल 2023 के जश्न के पहले टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट एंड वैक्सीनेशन पर ज़ोर.
December 24, 2022
संसद सत्र तय समय के पहले स्थगित – नए साल 2023 के जश्न के पहले टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट एंड वैक्सीनेशन पर ज़ोर
चुपचाप देखते रहते हो| chupchap dekhte rahte ho.
December 24, 2022
चुपचाप देखते रहते हो जाने कैसा दौर गुज़र रहा है ये , खुदा का घर दहशत में है जन्नत लिपटी
कोविड संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है covid crisis is not over yet
December 22, 2022
कोविड संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है दुनिया के कई देशों में फ़िर तेजी से फैल रहे विस्फोटक कोविड-19 वेरिएंट
आज का नेता | aaj ka neta
December 22, 2022
आज का नेता नेताजी का पेट निरालाभरे इसे पैसों की मालाफर्क ना इसको पड़े कभीचाहे गिरे ओस या पाला।। कुर्सी-कुर्सी
भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी
December 22, 2022
भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) 2022 यह रिपोर्ट राज्य और

