व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं गंभीर …
Related Posts
कोविड-19 को नव वर्ष 2023 में जड़ से मिटाने का प्रण लें |
January 2, 2023
आओ कोविड-19 को नव वर्ष 2023 में जड़ से मिटाने का प्रण लें दो साल बाद नए साल 2023 के
आओ नए वर्ष में दुख और परिश्रम के महत्व को समझें
January 2, 2023
आओ नए वर्ष में दुख और परिश्रम के महत्व को समझें दुख़ और परिश्रम का मानव जीवन में महत्व –
भावनानी का व्यंग्यात्मक भाव
January 2, 2023
भावनानी का व्यंग्यात्मक भाव–पगार कम पर वीआईपी जिंदगी जीता हूं परिवार को वीआईपी सुविधा सुविधाएं देता हूं बच्चों को महंगी
इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार | isliye tumse milta hu mai bar bar
January 2, 2023
इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार इसलिए तुमसे मिलता हूँ , मैं बार बार। मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए
ना रहा यकीन तुझपे | na raha tujhpe yakeen
January 2, 2023
ना रहा यकीन तुझपे ना रहा यकीन तुझपे,ना कोई उम्मीद तुमसे। हो गई अब वो खत्म, जो थी उम्मीद तुमसे।।
हम नये वर्ष में यह प्रण करें
December 31, 2022
हम नये वर्ष में यह प्रण करें हम नये वर्ष में यह प्रण करें। हम जीवन को ऐसा धारण करें।।

