व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं गंभीर …
Related Posts
माता-पिता का सम्मान कर, उनसे जीवन जीने की कला सीखें
March 4, 2023
माता पिता का स्थान गुरु से भी ऊंचा है आओ माता-पिता का सम्मान कर, उनसे जीवन जीने की कला सीखें
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
March 4, 2023
भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो अटके काम बनाना है तो
नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है
March 4, 2023
भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने
धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं
March 4, 2023
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा
शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं
March 4, 2023
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं पद और कुर्सी से बेवफाई किया हूं मैंने
मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है
March 4, 2023
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है उसको बहुत सफ़लता मिलती है तो उसपर मां लक्ष्मी की कृपा

