व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं गंभीर …
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गीत हमारे कुछ गीत ऐसे दर्द भरे,गाकर सुना सकता नहीं, पहले मेरे अश्क बहते,दर्द छुपा पाता नहीं ।। दृश्य ऐसे
आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी
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रघुवीर सहाय पर कविता- सुधीर श्रीवास्तव
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कोई हल तो होगा- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘
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