व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं गंभीर …
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व्यंग्य सरकारी लाइसेंस तो हम बीवियों के पास आज के कलयुगी दुनिया में न जाने किस-किस तरह कि घटनाएं नित
ऐसा हमारा जीवन हो।
October 11, 2022
ऐसा हमारा जीवन हो। संतुष्टि और सहनशीलता हो,इंसान इंसानियत से मिलता हो,तकलीफ और कांटों के साथ साथ,सुगंधित पुष्प भी खिलता
वक्त संग कारवां
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वक्त संग कारवां वक्त संग दर्द-ए कारवां मेरा गुज़रता जा रहा थादिल तेरे लौटने कि उम्मीद आज भी लगा रहा
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व्यंग काव्य
October 10, 2022
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