Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, lekh

रिश्ते कितने अपने कितने पराये!-अनिता शर्मा झाँसी

रिश्ते कितने अपने कितने पराये! हम सब समाज और परिवार से जुड़े होते हैं।बहुत खूब प्यारे से परिवार के सदस्यों …


रिश्ते कितने अपने कितने पराये!

रिश्ते कितने अपने कितने पराये!-अनिता शर्मा झाँसी

हम सब समाज और परिवार से जुड़े होते हैं।बहुत खूब प्यारे से परिवार के सदस्यों से भावनात्मक रूप से प्यार अपनापन और सहयोग मिलता रहता है।
रिश्तों में दरार तभी पड़ती है जब स्वार्थ पनपने लगता है।वहाँ से एक खिंचाव उत्पन्न हो जाता है।एक सदस्य जब प्रगति करने लगता है और कोई सदस्य असफल होता है तो बीज प्रस्फुटित होता है ईर्ष्या का।धीरे-धीरे परिवार में सदस्यों में दूरी बढ़ने लगती है ।कभी-कभी तो क्लेश ईर्ष्यालु रवैया रिश्तों को विषैला कर देते हैं।
हाँ अपेक्षा भी बहुत हद तक कड़वाहट बढ़ा देती है।
परिवार में सामन्जस्य होना बहुत जरूरी है तभी सब एक दूसरे को समझेंगे और इज्जत करेंगे।
रिश्तों को सौहार्दपूर्ण बनाया जा सकता है हर व्यक्ति ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करे।बड़े को पूर्ण सम्मान मिले और वहीं छोटो को स्नेह।
मेरे विचार से परिवार के मुखिया को आत्म नियंत्रण रखते हुए परिवार की बागडोर निष्पक्ष रूप से संभालनी चाहिए।जहाँ कोई भी निरंकुश न हो।अधिकारों के साथ साथ कर्तव्यों को निभाया जाना चाहिए।
परिवार हो या समाज रिश्तों में लेना और देना समरूपता से होना चाहिए।
रिश्तों में बंधा हुआ संसार कितना प्यारा,कितना समृद्ध हो सकता है।कोशिश हर रिश्तों में जरूरी है।
मन मुटाव और वैचारिक मतभेद तो हर जगह होते हैं जरूरत इनको बैठकर समझ बूझ से हल करने की है पर….सभी के मन अलग-अलग हैं।सभी अपने पूर्वजन्म के कर्म का प्रारब्ध लेकर आया है तो हम चाह कर भी नहीं बदल सकते।
एक सच और भी है बनाना बिगाड़ना दोनो ओर की मानसिकता पर निर्भर करता है।
एक उपवन में कई वृक्षो की तरह रिश्ते है और रंग बिरंगे फूलों की तरह हम सब उस उपवन रूपी पारिवारिक रिश्तों से जुड़े हैं।महकना या सूख कर झड़ना ये हमारे ऊपर निर्भर करता है।
रिश्तों की खूबसूरती सामन्जस्य प्रेम विश्वास में है।
मित्रता का रिश्ता हो या औपचारिकता का प्यार दमकता तभी है जब अपेक्षाओ पर नियंत्रण हो।
अपेक्षा ही तो उपेक्षा को जन्म देती है।

अनिता शर्मा झाँसी


Related Posts

दे दाता के नाम तुझको अल्ला रखे

January 19, 2023

 दे दाता के नाम तुझको अल्ला रखे आंखें हिंदी चलचित्र था जो बचपन में देखा था जिसकी याद आज समाचारों

बड़वा का प्राचीन झांग-आश्रम जहां बादशाह जहांगीर ने डाला था डेरा

January 19, 2023

बड़वा का प्राचीन झांग-आश्रम जहां बादशाह जहांगीर ने डाला था डेरा 1620 ईसवी के आस -पास मुग़ल बादशाह (सलीम) जहांगीर

‘गोल’ माल: पेले और पालेकर |Golmal : pele aur palekar

January 15, 2023

‘गोल’ माल : पेले और पालेकर दिसंबर के अंतिम सप्ताह में, फुटबाल के खेल में दंतकथा स्वरूप ब्राजिलियन फुटबालर एडिसन

धैर्य | dhairya

January 15, 2023

धैर्य बचपन से सुनते आएं हैं धैर्य से काम लो तो फल जरूर मिलेंगे।आजकल के ज़माने में धैर्य खत्म होता

भारतीय कौशल नारी सब पर भारी

January 15, 2023

भारतीय कौशल नारी सब पर भारी आओ नारी शक्ति को भारत की सफ़लता की गाथा बनाएं नारी शक्ति को भारत

हिन्दी हमारी कितनी? | Hindi hamari kitni?

January 13, 2023

हिन्दी हमारी कितनी? हिंदी दिवस की शुभकामनाएं के अनगिनत msg पाएं किंतु कैसे छुड़वा पाएंगे अंग्रजी के पाश से? Msg

PreviousNext

Leave a Comment