राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी
राजनीति भी अजीब है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी …
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मोहब्बत ए परवाना कहते हैं वो मोहब्बत ए परवाने , इस अंजुमन में रखा क्या हैतेरे हुस्न दीदार के बिना
गम की बदली
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‘गम की बदली’ मैं गमों से भरी सराबोर बदली हूँ बरसना मेरी फ़ितरत है, यूँ तरस खाकर पौंछिए नहीं रहने
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April 25, 2022
कविता -मेरा जीवन सुखी था मेरा जीवन सुखी था जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता
कविता-विज्ञान में हम को आधुनिक बनाया
April 25, 2022
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कविता -मां का वात्सल्य प्रेमामई ममता
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कविता -मां का वात्सल्य प्रेमामई ममता मां वात्सल्य प्रेमामई ममता मिलती हैं सभको कोई अच्छूता नहीं कद्र करने की बात
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April 25, 2022
कविताहां फ़िर भी मुझ पर शक करो मैंने किसी की बुराई, चुगली, चोरी की नहींहां फिर भी मुझ पर शक