Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mamta_kushwaha, poem

मेरी दादी माँ| meri dadi maa

 मेरी दादी माँ आज की शाम मेरी दादी के नाम कर रहे सब आज तुम्हारी बातें इकट्ठा हो घर के …


 मेरी दादी माँ

आज की शाम मेरी दादी के नाम
कर रहे सब आज तुम्हारी बातें
इकट्ठा हो घर के सदस्य सभी
और मुझे खल रही कमी तेरी दादी
क्या करे हम सब… 
अचानक जो छोड़ चली गई हमें, 
आज आपकी बातें बन कर रहे गई यादें
सुन रही हो न दादी हमारी
किस तरह सभी इकट्ठा हो कर रहे बातें आपकी
 बिना आपके घर हो गया सुना, 
बाबा (दादा जी) को जब याद आ रही है आपकी
बुला सबको कहते…… 
कहा छोड़ चली गई मेरी पत्नी
कभी कहते कब आयेगी तेरी दादी
खाना खिलाने अपने हाथों से
तो कभी कहते अब उसके बिना 
क्या करेंगे जी कर हम, 
पल पल सताती कमी तुम्हारी दादी
माँ – पापा का क्या हाल बताऊँ
छुप कर हम सबसे आंसू बहाते
और कहते माँ(मेरी दादी) बिना घर हो गया सुना
अब बढ़ गई उनकी और जिम्मेदारी, 
भैया का क्या हाल सुनाऊ
पल -पल तड़प रहे है वो 
अचानक जो छोड़ चली गई हमें
दादी माँ हमारी
बड़े भैया की आंखे हो गयी
मानो बहता पानी… 
और कह रहे वह सबसे
कौन करेगा इंतजार मेरा , 
घर आने से देर होने पर
अब कौन करेगा सवाल अनेक हमसे
सुन रही हो न दादी
छोटे भैया कह रहे सबसे
दादी का दुलारा हूँ मैं
रखती थी खाने – सोने का ख्याल मेरा, 
क्या हाल बताऊँ सबका बिना आपके
सबकी बातें सुन कह रही भाभी
अब कौन सिखायेगा घर संवारने की बातें
सुन रही हो न दादी, 
मुझे सता रही है सबके बीच कमी तुम्हारी
कितना भी लिखूँ कम पड़ जायेंगे शब्द मेरे
देती हूँ अश्रुपूर्ण श्रंद्धांजलि तुम्हें दादी
करती हूँ प्रार्थना ईश्वर से
बना रहे आपका आशीर्वाद हमसब पर 
आज की शाम आंखे हो गयी सबकी नम 
सुन रही हो न दादी खल रही है कमी तुम्हारी । 

About author   

Mamta Kushwaha
ममता कुशवाहा

स्वरचित रचना
मुजफ्फरपुर, बिहार



Related Posts

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब

यादें-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

यादें जब आई न नींद खूब उधेड़े ताने बानेकुछ दिन ही नहीं कुछ महिनें ही नहींसालो तक पहुंचाईबचपन से हुई

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती

February 14, 2022

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती सामाजिक सद्भाव, सौद्रह्यता, समरसता, मानवतावादी दृष्टि की सोच में युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग

Leave a Comment