Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

माँ तेरे इस प्यार को

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो …


माँ तेरे इस प्यार को

सत्यवान 'सौरभ'

तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।
सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास ।।

माँ ममता की खान है, धरती पर भगवान ।
माँ की महिमा मानिए, सबसे श्रेष्ठ-महान ।।

माँ वीणा की तार है, माँ है फूल बहार ।
माँ ही लय, माँ ताल है, जीवन की झंकार ।।
माँ ही गीता, वेद है, माँ ही सच्ची प्रीत ।
बिन माँ के झूठी लगे, जग की सारी रीत ।।
माँ हरियाली दूब है, शीतल गंग अनूप ।
मुझमें-तुझमें बस रहा, माँ का ही तो रूप ।।
माँ तेरे इस प्यार को, दूँ क्या कैसा नाम ।
पाये तेरी गोद में, मैंने चारों धाम ।।

–सत्यवान ‘सौरभ’

(दोहा संग्रह तितली है खामोश से )

— सत्यवान ‘सौरभ’,
रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,

 आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045

Related Posts

एक साथ चुनाव लोकतंत्र के लिए हानिकारक क्यों?

September 23, 2023

एक साथ चुनाव भारत के लोकतंत्र के लिए हानिकारक क्यों? एक साथ चुनावों से देश की संघवाद को चुनौती मिलने

वाहनों पर जातिगत-धार्मिक स्टिकर, अशांति के स्पीकर-तनाव के ट्रीगर

September 21, 2023

वाहनों पर जातिगत-धार्मिक स्टिकर, अशांति के स्पीकर-तनाव के ट्रीगर वाहनों पर ‘जाति और धार्मिक स्टिकर’ की कानूनी जांच व्यक्तिगत अभिव्यक्तियों,

साहित्यकार डॉ सत्यवान सौरभ को पंडित प्रताप नारायण मिश्र स्मृति राष्ट्रीय युवा साहित्य सम्मान

September 19, 2023

हरियाणा के नवोदित साहित्यकार डॉ सत्यवान सौरभ को पंडित प्रताप नारायण मिश्र स्मृति राष्ट्रीय युवा साहित्य सम्मान स्कूल की प्रार्थना

Kavita-पति को भी इंसान मानो

September 18, 2023

पति को भी इंसान मानो उसके कंधे है इतने मजबूतवह सारी दुनिया को उठा लेगा तुम एक सुख दे कर

अनगिनत नाम दे कर

September 18, 2023

अनगिनत नाम दे कर मेरे दिल की धड़कनें धड़क कुछ कहती,मेरी सांसें थम-थम चलती ही रहती।गौर से सुना अपनी सॉंसों,

राष्ट्रभाषा या राजभाषा | rashtrabhasha ya rajbhasha

September 16, 2023

राष्ट्रभाषा या राजभाषा अपने ही देश में दिवस मनवाने की मोहताज़ हूँ,विवश हूँ मैं..राष्ट्रभाषा हूँ या राजभाषा हूँ,आज भी इस

PreviousNext

Leave a Comment