Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

मकर संक्रान्ति का महत्व

मकर संक्रान्ति का महत्व  हिंदू धर्म ने माह कोदो पक्षों में बाँटा गया हैकृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष,वर्ष को भी …


मकर संक्रान्ति का महत्व 

मकर संक्रान्ति का महत्व

हिंदू धर्म ने माह को
दो पक्षों में बाँटा गया है
कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष,
वर्ष को भी दो भागों में बाँट रखा है

 पहला उत्तरायण और दूसरा दक्षिणायन।
 दोनों अयन मिलकर होते एक वर्ष।
जब सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा कर
दिशा बदलता उत्तर की ओर ढलता
तब उत्तरायण काल होता।
सूर्य केंद्रित मकर संक्रांति का
अपना महत्व है।
धार्मिक ग्रंथों, वेदों, पुराणों में
इसका विलरण मिलता।
हर पर्व त्योहार की अपनी कथा है,
मकर संक्रांति खगोलीय घटना से
सीधा सीधा जुड़ा है,
मगर यह सिर्फ़
खगोलीय घटना भर नहीं है
जड़ चेतन की दिशा और दशा भी
इससे तय होती है।
सूर्य के धनु मकर राशि में प्रवेश को
उत्तरायण कहते हैं,
परिवर्तन के इस समय को ही
मकर संक्रांति कहते हैं।
हिंदूधर्म में मकर संक्रांति का
ठीक वैसा ही महत्व है
जैसे पेड़ पौधों में पीपल, नीम, तुलसी
पशुओं में गाय,हाथियों में ऐरावत
पहाड़ों में हिमालय, नदियों में गंंगा
आराध्यों में कुलदेवी/देवता का है।
आज से हमारी धरती एक नए वर्ष में
सूर्य एक नई गति में प्रवेश करता है
14 जनवरी ऐसा दिन होता है
जब धरा पर अच्छे दिनों का
शुभारंभ माना जाता है,
क्योंकि सूर्य दक्षिण के बजाय
उत्तर को चलने लगता है।
जब तक सूर्य पूर्व से
दक्षिण की ओर चलता है
तब उसकी किरणों का असर
खराब माना जाता है,
फिर जब सूर्य पूर्व से की ओर
आगे बढ़ने लगता है
तब उसकी किरणों का असर
सेहत, समृद्धि करता शांति बढ़ाता हैं।
अलग अलग राज्यों अलग अलग नाम
भले हों मकर संक्रांति के
पर महत्व सबके लिए एक जैसा है,
अलग अलग मान्यताएं परंपराएं हों
पर उत्साह, उमंग एक सा है।
तिड़ गुड़ ,खिचड़ी खाने और दान की
पतंग उड़ाने के साथ साथ
गरीबों असहायों को कंबल बाँटने की
गायों को गुड़ और घास खिलाने की
बहुतेरी मान्यताएं हैं।
मकर संक्रांति को ही
माँ गंगा का धरा पर आगमन हुआ था, पितामह भीष्म ने
सूर्य के उत्तरायणोपरांत ही
स्वेच्छा से शरीर छोड़ा था।
मकर संक्रांति का अपना ही महत्व है
जो आत्माएं मुक्त होती
उत्तरायण में देह से
देवलोक में चली जाती हैं
या मुक्त हो जाती हैं
पुनर्जन्म के चक्रावागमन से ।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

तुलसी आज| Tulsi-aaj

March 28, 2023

तुलसी आज क्यों में तुलसी तेरे आंगन की बनूंमेरी अपनी महत्ता मैं ही तो जानूं संग तेरे रहूंगी जीवन भर

सतकर्म ही पूजा है| satkarm-he-pooja

March 28, 2023

सतकर्म ही पूजा है सोचो समझो इससे बड़ा ना कोई इस जग मे दूजा हैसच करो सतकर्म दुनिया मेंयही तो

पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से लाल।।

March 22, 2023

पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से लाल।। भगत सिंह, सुखदेव क्यों, खो बैठे पहचान। पूछ रही माँ भारती, तुम

मौत का मुल्यांकन | maut ka mulyankan

March 22, 2023

 भावनानी के भाव मौत का मुल्यांकन मैंने भी सोचा हम तो यूं ही जिंदगी  जिए जा रहे हैं बेकार  मौत

चार बातें तो सुनना ही पड़ेगा

March 22, 2023

भावनानी के भाव चार बातें तो सुनना ही पड़ेगा अगर घर के हेड हो, जवाबदार हो।चार बातें तो सुनना ही

हमें शक्तिशाली राष्ट्रीय अभियान चलाना है

March 19, 2023

 भावनानी के भाव हमें शक्तिशाली राष्ट्रीय अभियान चलाना है प्राकृतिक संसाधनों को बचाना है प्राचीन संस्कृति का युवाओं में प्रसार

PreviousNext

Leave a Comment