Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, lekh

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खाए!!!!

 बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खाए!!!! अनिता शर्मा #बोया वृक्ष बबूल का तो आम कहाँ से होए …


 बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खाए!!!!

अनिता शर्मा झाँसी
अनिता शर्मा

#बोया वृक्ष बबूल का तो आम कहाँ से होए

आम तौर पर जीवन में सुनने मिल जाता है मेरे साथ फलां ने ऐसा किया,वैसा किया।

कभी गौर फरमाया है —सब कर्मो का प्रतिफल है।जो लौटकर जरूर वापस आता है ,चाहे इस जन्म में या अगले जन्म में।

कभी कभी यह कहते भी सुनते हैं मैंने तो हमेशा फलाँ का भला चाहा पता नहीं उसको मुझसे क्या दुश्मनी है।भाई बीते जन्म में आपने दुश्मनी निभाई थी वो आज इस जन्म में लौटा रहा है।

सब कर्म लौटकर वापस आते हैं।आप बीज अच्छे बोइये तो फसल भी अच्छी होगी।जब बबूल के वृक्ष लगाओगे तो आम कहाँ से खाओगे।कांटे ही चुभेगे,मीठे आम नहीं खाने मिलेगे।

एक संकल्प संग जीवन जीना है।कर्मो को अच्छे सखना है।

भूलकर भी बबूल के वृक्ष न लगायें।

इसीलिए कहा गया है न—-

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए।

—–अनिता शर्मा झाँसी

—–मौलिक रचना


Related Posts

द्वितीय लोकतंत्र शिखर सम्मेलन 29-30 मार्च 2023 का आगाज़

April 3, 2023

द्वितीय लोकतंत्र शिखर सम्मेलन 29-30 मार्च 2023 का आगाज़ लोकतंत्र को अधिनायकवाद और भ्रष्टाचार से बचाकर मानवाधिकार के प्रति सम्मान

ग्लोबल वाटर सिक्योरिटी रिपोर्ट 2023 – जल सुरक्षा में 33 देशों का आंकलन | global water security report

April 3, 2023

ग्लोबल वाटर सिक्योरिटी रिपोर्ट 2023 – जल सुरक्षा में 33 देशों का आंकलन जल मानवता के लिए रक्त की तरह

दुल्हन की शाॅपिग लिस्ट में यह हाॅट और सेक्सी लाॅन्जरी होनी ही चाहिए

March 28, 2023

दुल्हन की शाॅपिग लिस्ट में यह हाॅट और सेक्सी लाॅन्जरी होनी ही चाहिए जिन युवतियों की शादी होनी होती है,

राजनीतिक धमासान! Rajneetik ghamashan

March 28, 2023

राजनीतिक धमासान! नेताजी, हम मतदाता सबकुछ देख, सोच और समझ रहे हैं पक्ष-विपक्ष के संसद से सड़क तक धमासान से

राजनीति और नैतिक मूल्य| rajneetik aur naitik mulya

March 28, 2023

राजनीति और नैतिक मूल्य सन 1908 में गाँधी जी ने अपने विचार जनता के सामने “हिन्द स्वाराज” के नाम से

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

March 28, 2023

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूलदेवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील

PreviousNext

Leave a Comment