Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर …


सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-
बताओ न कैसे रहते हो

बताओ न कैसे  रहते हो ?--सिद्धार्थ गोरखपुरी

मौसम ठंडा सूरज मद्धम
ऊपर से बदन पर कपड़े कम
सड़क किनारे तम्बू ताने
बताओ ना कैसे रहते हो?

सर्द हवा का तेज सा झोका

फ़टे तम्बू में अनेक झरोखा
कंपकपाते चुपके से बैठे
इतनी सर्दी कैसे सहते हो
बताओ ना कैसे रहते हो?

नहीं कोई घरबार तुम्हारा
साथ में है परिवार तुम्हारा
ठण्ड से मर जाएंगे पापा
ये बच्चों की बातें कैसे सुनते हो
बताओ ना कैसे रहते हो?

न रोजी है न रोटी का साधन
न कोई सुविधा न कोई प्रसाधन
दिल पे हाथ रखकर बताओ
कैसे करते हो जीवन यापन
अपनी व्यथा और दुर्दशा को
बताओ न किससे कहते हो?
बताओ ना कैसे रहते हो?

परिवार के हो एकमात्र सहारे
भटकते हो बस मारे – मारे
सरकार हक देने से रही
हक जानो अपना और लेलो प्यारे
बच्चों की इच्छाएं अधूरी रख
अपने वादे से रोज मुकरते हो
बताओ ना कैसे रहते हो?

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

Meri pyari Bhasha Hindi by dr kamlendra kumar

September 12, 2021

 मेरी प्यारी भाषा हिन्दी                  हिन्दी है इक प्यारी भाषा ,    

Hindi Divas vishesh, hindi meri Bhasha by mainuddin kohri

September 12, 2021

हिन्दी दिवस पर विशेष       हिंदी मेरी भाषा    प्यारी – प्यारी  सबसे न्यारी मेरी भाषा । हिंदी

Mai ek adhyapak hu by Jitendra Kabir

September 12, 2021

 मैं एक अध्यापक हूं… एक बच्चे को  उसकी क्षमता के अनुसार समाज में स्थान दिलाना चाहता हूं, मैं एक अध्यापक

Vakt se bada koi shikshak nhi by Jitendra Kabir

September 12, 2021

 वक्त से बड़ा कोई शिक्षक नहीं बचपन से मां-बाप, बड़े बुजुर्गों ने सिखाए बहुत से सबक, कुछ याद रहे, कुछ

Aisa samay aayega by Jitendra Kabir

September 12, 2021

 ऐसा समय आएगा जिस तरह से हर बात में  घुस रही है राजनीति आजकल जल्द ही ऐसा दिन आ जाएगा,

Shant tatasth tapasvi sa himraj by Anita Sharma

September 12, 2021

 शान्त तटस्थ तपस्वी सा हिमराज। शान्त तटस्थ तपस्वी सा हिमराज। श्वेत रजत अविराम विस्तारित। सुषमा सुशोभित शाश्वत स्निग्ध शान्त। ओजस्वी

Leave a Comment