Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

परछाईं- सुधीर श्रीवास्तव

परछाईं वक्त कितना भी बदल जायेहम कितने भी आधुनिक हो जायें, कितने भी गरीब या अमीर होंराजा या रंक हों …


परछाईं

परछाईं- सुधीर श्रीवास्तव

वक्त कितना भी बदल जाये
हम कितने भी आधुनिक हो जायें,

कितने भी गरीब या अमीर हों
राजा या रंक हों

नर हो या नारी हों
परछाईं हमारी आपकी अपनी है।

सबसे करीब सबसे वफादार
साथ नहीं छोड़ती,

हम चाहें भी तो भी नहीं
मरते दम तक साथ निभाती है,

हमारे साथ चिता तक जाती
हमारे शव के साथ जलकर

हमारे शरीर का अस्तित्व मिटने के साथ
हमारी परछाईं मिट जाती

अपना वजूद खो देती।
मगर विडंबना देखिये

हमसे कुछ नहीं पाती
न ही कुछ चाहती है

परंतु हमारा साथ पूरी निष्ठा से निभाती
पर छाईं होकर भी

हमारे वजूद से हमेशा चिपकी रहती
हर कदम पर साथ देती
हमारी अपनी परछाईं।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
© मौलिक, स्वरचित


Related Posts

नशा एक परछाई-जयश्री बिरमी

January 7, 2022

नशा एक परछाई क्यों चाहिए तुम्हे वो नशाजो तुम्हे और तुम्हारे प्यारोंको करता बरबाद हैं नशा करों अपने काम काया

द्विधा में लोकतंत्र- जयश्री बिरमी

January 7, 2022

 द्विधा में लोकतंत्र  विरोध किसका संस्कृति का? क्यों हमारे समाज में कोई भी प्रश्न नहीं होने के बावजूद प्रश्नों को

सुबह- चन्दा नीता रावत

January 7, 2022

। । सुबह ।। सुबह सवेरे जब रात ढले सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आतीपृथ्वी के हरे चादर पर लालिमा

गगन की बुलन्दीयो को छुना- चन्दानीता रावत

January 7, 2022

गगन की बुलंदियों को छूना हैं  उड़ना है हमे उड़ना हैगंगन की बुलंदियों को छूना हैआँखो के हसीन ख्वाब कोवास्तविकता कर जीना

जानना – चन्दानीता रावत

January 7, 2022

।।जानना ।। सृष्टि पर आये हो तो जानना सीखोजान जाओ परिस्थियो कोपरिवेश को तुम जानना सीखो सीख जाओगे तू जिन्दगी

नए साल में नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

नए साल में नई शुरुआत! नया-नया सा साल, नई नई सी बातें,नया नया सब कुछ है, नई नई सौगातें,नए-नए से

Leave a Comment