Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां- सुधीर श्रीवास्तव

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां नववर्ष के साथ नयी नयीचुनौतियां भी कम नहीं है, ओमीक्रान पहले से ही डरा रही …


नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां- सुधीर श्रीवास्तव
नववर्ष के साथ नयी नयी
चुनौतियां भी कम नहीं है,

ओमीक्रान पहले से ही डरा रही है,
राजनीति का पराभव
किसी खतरे से कम नहीं है,

नेताओं के बिगड़ते बोल
देश की मानसिकता दूषित कर रहे हैं,

स्वार्थ में अंधे नेता
देश के लिए जोंक से कम नहीं हैं।

अराजकता और आतंकवाद फैलाने के
खतरे बरकरार हैं,

देश को अस्थिर और कमजोर ही नहीं
षड्यंत्र कर देश को हर स्तर पर

नीचा दिखाने का प्रयास करते रहने वाले
देश में कथित रहनुमा भी कम नहीं हैं।

नारियों का भय आज भी बरकरार है
हर बात पर सरकार पर
आरोप लगाने वालों की भरमार है।

संसद विधानसभाएं अखाड़ा सी
अब लगने लगी हैं,
जनता के धन पर बेशर्मी से नृत्य की
जैसे रीति बन गयी है।

बेरोजगारी डरा रही है,
बढ़ती जनसंख्या भारी पड़ रही
जनसंख्या नियंत्रण चुनौती है,

जनसंख्या नियंत्रण बिल
अभी टेढ़ी खीर लगती है।

अल्पसंख्यक बहुसंख्यक का खेल
खतरनाक हो रहा है,

लगता है जैसे हमारे लोकतंत्र को
हर दिन डरा है,

समस्याएं स्वास्थ्य, शिक्षा की भी
अभी कम नहीं हैं,

हमारी सरकारें प्रयास भी
कम नहीं कर रही हैं।

संवैधानिक संस्थाओं पर हमले
हमारी व्यवस्था को मुँह चिढ़ा रहे हैं,

तैयारियों पर चुनौतियां भारी पड़ रही हैं।
देश की अर्थव्यवस्था को

मुँह चिढ़ा रही हैं।
हम भी कम नहीं हैं

सुविधाएं सरकार से सब चाहते हैं
साथ ही सरकार की राह में

रोड़े अटकाने में पीछे कहाँ हैं?
चुनौतियों और तैयारियों का

कोई मेल नहीं है,
बाहर भीतर की कैसी भी चुनौतियां

सरकार हर चुनौती से निपट सकती है मगर उसकी हर तैयारी में
हम आप ही नित नयी

दीवार बन रहे हैं,
देश के विकास में काँटे बिछा रहे हैं।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित,


Related Posts

आसान रास्ता- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

आसान रास्ता वक्त ज्यादा लगता है,जुनून ज्यादा लगता है,प्रतिभा ज्यादा लगती है,साल दर साल मेहनत करकेएक नया एवं बेहतर इतिहास

वो तैयार बैठी हैं अब- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

वो तैयार बैठी हैं अब लोकतंत्र में…चुनी गईं सरकारेंजनता की आवाज उठाने के लिए,निरंकुश हो,तैयार बैठी हैं अबजनता की ही

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता आज मेरे स्वप्न में..पेड़ों ने हड़ताल कीपरिंदों के आज़ादी सेआकाश में उड़ने परलगे प्रतिबंधों

मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही

Leave a Comment