Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, satyawan_saurabh

टूट रहे परिवार !

टूट रहे परिवार ! बदल गए परिवार के, अब तो सौरभ भाव ! रिश्ते-नातों में नहीं, पहले जैसे चाव !! …


टूट रहे परिवार !

सत्यवान 'सौरभ
बदल गए परिवार के, अब तो सौरभ भाव !

रिश्ते-नातों में नहीं, पहले जैसे चाव !!

टूट रहे परिवार हैं, बदल रहे मनभाव !
प्रेम जताते ग़ैर से, अपनों से अलगाव !!

गलती है ये खून की, या संस्कारी भूल !
अपने काँटों से लगे, और पराये फूल !!

रहना मिल परिवार से, छोड़ न देना मूल !
शोभा देते हैं सदा, गुलदस्ते में फूल !!

होकर अलग कुटुम्ब से, बैठें गैरों पास !
झुँड से निकली भेड़ की, सुने कौन अरदास !!

राजनीति नित बांटती, घर-कुनबे-परिवार !
गाँव-गली सब कर रहें, आपस में तकरार !!

मत खेलों तुम आग से, मत तानों तलवार !
कहता है कुरुक्षेत्र ये, चाहो यदि परिवार !!

बगिया सूखी प्रेम की, मुरझाया है स्नेह !
रिश्तों में अब तप नहीं, कैसे बरसे मेह !!

बैठक अब खामोश है, आँगन लगे उजाड़ !
बँटी समूची खिड़कियाँ, दरवाजे दो फाड़ !!

विश्वासों से महकते, हैं रिश्तों के फूल !
कितनी करों मनौतियां, हटें न मन की धूल !!

सौरभ आये रोज ही, टूट रहे परिवार !
फूट कलह ने खींच दी, आँगन बीच दिवार !!

सत्यवान ‘सौरभ’,
रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045


Related Posts

अश्लील वीडियो कॉल्स के चक्रव्यूह का खुलकर करे सामना

January 3, 2023

अश्लील वीडियो कॉल्स के चक्रव्यूह का खुलकर करे सामना इस अपराध के पीछे संगठित अपराध समूह ज्यादातर विदेशों में स्थित

इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार | isliye tumse milta hu mai bar bar

January 2, 2023

 इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार इसलिए तुमसे मिलता हूँ , मैं बार बार। मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए

ना रहा यकीन तुझपे | na raha tujhpe yakeen

January 2, 2023

 ना रहा यकीन तुझपे ना रहा यकीन तुझपे,ना कोई उम्मीद तुमसे। हो गई अब वो खत्म, जो थी उम्मीद तुमसे।।

हम नये वर्ष में यह प्रण करें

December 31, 2022

 हम नये वर्ष में यह प्रण करें हम नये वर्ष में यह प्रण करें। हम जीवन को ऐसा धारण करें।।

नववर्ष मंगल भावना | navvarsh mangal bhavna

December 31, 2022

नववर्ष मंगल भावना नव वर्ष में कुछ यूं जहां में प्रेम का विस्तार हो,ना कोई भूखा हो शहर में बीमार

नए साल के सपने जो भारत को सोने न दें।

December 31, 2022

नए साल के सपने जो भारत को सोने न दें। हमने कई मौकों पर अपने सपने को टूटते हुए देखा

PreviousNext

Leave a Comment