Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Chanda_rawat, poem

जानना – चन्दानीता रावत

।।जानना ।। सृष्टि पर आये हो तो जानना सीखोजान जाओ परिस्थियो कोपरिवेश को तुम जानना सीखो सीख जाओगे तू जिन्दगी …


।।जानना ।।

जानना - चन्दानीता रावत

सृष्टि पर आये हो तो जानना सीखो
जान जाओ परिस्थियो को
परिवेश को तुम जानना सीखो

सीख जाओगे तू जिन्दगी जीना,

मंज़िल भी पा लोगे,

जानकार जब बन जाओ गे
भ्रम से यर्थाथ के उलझनो से
निकल जाओगे

ना जान  सके परिस्थियो को
माया मे उलझ जाओगे ,
जानकारियो से पूर्ण बनाओ व्यक्तिव को अपने,

सृष्टि पर आये होतो जानना सीखों 

स्थितियो को पहचानना सीखो,

चन्दानीता रावत
औरंगाबाद वाराणसी


Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment