Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

ज़िंदगी- सुधीर श्रीवास्तव

 ज़िंदगी वाह री जिंदगी तू भी कितनी अजीब जाने क्या क्या गुल खिलाती है कभी हंसाती, कभी रुलाती है और …


 ज़िंदगी

ज़िंदगी- सुधीर श्रीवास्तव

वाह री जिंदगी

तू भी कितनी अजीब

जाने क्या क्या गुल खिलाती है

कभी हंसाती, कभी रुलाती है

और तो और कभी जीने तो

कभी मरने नहीं देती।

जो जीवन चाहता है उससे छीन लेती है

जिसके जीवन में जीने के बहाने तक नहीं होते

उसे मरकर मुक्त भी होने नहीं देती।

जिंदगी के फलसफे में बड़ी भ्रांतियां हैं,

हम कुछ भी कहें

चाहे जितने तर्क, वितर्क करें

अपने अथवा औरों को 

भरमाने के शब्दजाल बुनें।

परंतु जिंदगी दोधारी तलवार है

उससे भी आगे ये बिना संविधान के है,

ऊपर से इसकी धाराएं रोज रोज बदलती हैं,

कभी सलीके से नहीं बढ़ती हैं।

लाख कोई चाहे

जिंदगी सलीके से नहीं चलती है,

या यूं कहें चल ही नहीं सकती

हमेशा उलझाए रखती है,

जिंदगी बहानों की आड़ में आगे बढ़ती है

कभी रुकती भी नहीं है,

जिंदगी की कोई राह किसी को

पहले से पता भी नहीं लगती

पूर्वानुमान पर जिंदगी आगे बढ़ती

कभी हंसाती,कभी रुलाती

कभी मुंह चिढ़ाती, कभी ढेंगा दिखाती

तो कभी मजाक बनाती

अपनी ही रौ में आगे बढ़ती रहती

कभी नहीं ठहरती किसे के लिए

जिंदगी को समझने की कोशिश में

जिंदगी निकल जाती, खो जाती।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उत्तर प्रदेश
८११५२८५९२१
© मौलिक,स्वरचित
०६.०४.२०२२


Related Posts

Harj kya hai by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 हर्ज क्या है? भाषण से पेट भरने की कला सीख ली है हमनें, रोटी को गाली देनें की  हिमाकत करने

Bura man kar mat baitho by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 बुरा मनाकर मत बैठो उस समय भले ही बुरा लगे जब हमारे बुजुर्ग  डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर,

Prem pathik by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 प्रेम पथिक एक प्रेम बचपन में हुआ था पुस्तकों से, जब भी खोला उन्हें पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास और कल्पना

दर्द कहां से पाया हूं ?- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

September 22, 2021

 दर्द कहां से पाया हूं ? तपन जीवन की कहती है ,अपना जो शेष जीवन है ,धरा पर जो सुरक्षित

Desh ka durbhagya by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 देश का दुर्भाग्य  कृषि के लिए नीतियां बनाने में कृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने में शिक्षक

Shrad ka bhojan by Sudhir Srivastava

September 22, 2021

 श्राद्ध का भोजन कौआ बनकर मैं तुम्हारे घर की मुँडेर पर नहीं आऊँगा, अपने और पुरखों का सिर मैं झुकाने

Leave a Comment