Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

चाँद और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी

चाँद और मैं अमावस की काली रातों मेंउलझी हुई कई बातों मेंन पूछ! किस तरहा रहते हैंचाँद और मैं एक …


चाँद और मैं

चाँद  और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी
अमावस की काली रातों में
उलझी हुई कई बातों में
न पूछ! किस तरहा रहते हैं
चाँद और मैं एक साथ
रातों में तनहा रहते हैं
वो आसमान में तनहा है
मैं इस जहान में तनहा हूँ
वो श्याम रात में उलझा है
मैं खुदकी बात में उलझा हूँ
सुनने वाला है कोई नहीं
खुद कहते हैं खुद सुनते है
चाँद और मैं एक साथ
रातों में तनहा रहते हैं
घना बादल रह रह कर
चाँद से झगड़ा करता है
फिर चाँद चमकने के खातिर
बादल से सुलहा करता है
चाँद और मैं एक जैसे है
जो वक़्त से सुलहा करते हैं
चाँद और मैं एक साथ
रातों में तनहा रहते हैं
वो रात में इधर से उधर
आकाश में भटका दिखता है
ठीक चाँद के जैसे ही
मन एक जगह न टिकता है
हम दोनों के ख़्वाबों के मोती
हर रात में बिखरा करते हैं
चाँद और मैं एक साथ
रातों में तनहा रहते हैं

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

Kavita :बेशुमार इश्क | Beshumar ishq

October 8, 2023

बेशुमार इश्क सुनो दिकु…… मेरी यह बेकरारी, मेरा ये जुनूनवो मेरी तड़पन, बन्द आखों में  तुम्हारी गोद में सर रखने

करवा चौथ पर कविता

October 6, 2023

करवा चौथ भूख नहीं लगती है स्त्री को, करवाचौथ निभाने में,चाहे कितनी देर लगा ले चाँद आज नज़र आने में,उम्र

कविता –रौंद मुझे हंसने वाले

October 6, 2023

रौंद मुझे हंसने वाले मेरे लबों कि मुस्कुराहट लगता अब तो जैसे कहीं खो गई।यूं लगे मुझको की मेरी कलम

कविता -मेरी आवाज़ | meri aawaz kavita

October 4, 2023

कविता -मेरी आवाज़ | meri awaz kavita सुनो दिकु…. एक दिन वह सवेरा ज़रूर आएगाजो तुम तक मेरी आवाज़ पहुंचाएगा

कविता –उम्मीद | kavita -ummid

September 26, 2023

उम्मीद  जीवन की राह मेंएक युद्ध सा लड़ता जाता हूं उम्मीद बहुत ज्यादा की मुझे हाथ में कुछ नही पाता

कविता – नारी | kavita Naari| naari par kavita

September 23, 2023

कविता – नारी | kavita Naari| Naari par kavita  जिम्मेदारियों का बोझ जिसके सरहोता हैवही जानता है कैसे गुजर –

PreviousNext

Leave a Comment