Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mamta_kushwaha, poem

गले लगाना चाहती/ gale lagana chahti

 गले लगाना चाहती गले लगाना चाहती हूँ तुझे अबना चाहिए अब और कुछ, बस तुझमें समा जाना चाहती हूँएक कदम …


 गले लगाना चाहती

गले लगाना चाहती/ gale lagana chahti

गले लगाना चाहती हूँ तुझे अब
ना चाहिए अब और कुछ,

बस तुझमें समा जाना चाहती हूँ
एक कदम बढ़ा लिया हमने आज,

बस अगला कदम तेरा है
जिसका इंतजार हमे बेसब्री से है,

हर नाकाब उतार फेकना चाहती हूँ
ऐ मौत तुझे गले लगना चाहती हूँ,

थक गए हैं हम इन फरेबी दूनिया से
जहाँ ना कोई अपना है अब,

करो कुछ नया करामात तुम
कि हो जाए तमन्ना हमारी पूर्ण,

गले लगाना चाहती हूँ तुझे अब
ना चाहिए अब और कुछ ।

About author

स्वरचित रचना
ममता कुशवाहा
मुजफ्फरपुर, बिहार


Related Posts

Yadon ka tarana by kalpana kumari

July 3, 2021

यादों का तराना *** इस कदर सजाया है तेरी यादों को, कि मेरा आशियाना बन चुका है, इन्हीं आशियाने में,

Kaise puja? By kamal siwani bihar

July 3, 2021

 कैसी पूजा ? दया – प्रेम ना उर अंतर में , और पूजा पत्थर की । हे मानव यह कैसी

Parwah kaun karen by kalpana kumari

July 3, 2021

व्यंग्य-कवितापरवाह कौन करे जो स्वत: मिल रहा जीवन में, उसकी परवाह कौन करे। आती सांसे जाती सांसे, सांसो पर जो

Naari by kamal siwani ramgadh bihar

July 3, 2021

 नारी होती जहाँ नारी की पूजा , वहाँ देव बसते हैं । है वह देवी रूप जगत में , ग्रंथादिक

Vaccine lagwa lo bhai by gaytri bajpayi shukla

July 3, 2021

वैक्सीन लगवा लो भाई बुरा समय न कहकर आतापर जब आता कहर है ढाता ।कर न सकोगे फिर भरपाईवैक्सीन लगवा

Zindagi jal Dhar Jaisi by hare Krishna Mishra

July 3, 2021

 जिंदगी जल धार जैसी जिंदगी के हर मोड़ पर, हम अधुरे ही रहे , चल रहा था दो चार कदम,

Leave a Comment