Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा सुधीर श्रीवास्तव यह कैसी विडम्बना है कि हम सब जानते हैं मगर मानते …


 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

सुधीर श्रीवास्तव
सुधीर श्रीवास्तव

यह कैसी विडम्बना है

कि हम सब जानते हैं

मगर मानते नहीं हैं

कि हम क्या लेकर आये हैं

क्या लेकर जायेंगे?

खाली हाथ आये थे

तन पर कपड़े तो क्या

एक रेशा तक नहीं था।

फिर भी हम कितने भ्रम में रहते हैं

बस! हाय धन, हाय धन

इसी धुन में धनु पशु बनने से

खुद को रोक नहीं पाते हैं,

नीति, अनीति का विचार तक नहीं करते

क्या अपना है जो हम ले जायेंगे

यह विचार तक नहीं कर पाते

जब कुछ लाये ही नहीं थे

तो लेकर कैसे जा पायेंगे?

यह विचार करने की जरूरत है

न कुछ लेकर आये थे

और न ही कुछ लेकर जायेंगे

खाली हाथ  ही आया था, खाली ही जायेगा। 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश

८११५२८५९२१

© मौलिक स्वरचित

२६.०४.२०२२


Related Posts

ई-कचरा

February 7, 2022

ई-कचरा! कंप्यूटर और उससे संबंधित अन्य उपकरण,टीवी, वाशिंग मशीन, मोबाइल फोन से जुड़े उत्पादन,उपयोग से बाहर होने पर कहते हैं

हां ये तपिश हैं

February 7, 2022

हां ये तपिश हैं ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहकलाखों में न सही हजारों में हीललकार हैं प्रतिकार

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद

Leave a Comment