Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

कितना कठिन होता है ना? माँ होना

 कितना कठिन होता है ना? माँ होना सिद्धार्थ गोरखपुरी बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना। बस उँगलियों …


 कितना कठिन होता है ना? माँ होना

सिद्धार्थ गोरखपुरी
सिद्धार्थ गोरखपुरी

बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना।

बस उँगलियों के इशारों से ,सब कुछ बयां होना।

कयामत तलक माँ की दुआओं का साथ रहना,

कितना कठिन होता है ना? माँ होना।

धूल में खेलकर, देह और कपड़े को गंदा कर देना।

शैतानियों से माँ के जरूरी काम को ,मन्दा कर देना।

याद है न मैले -कुचैटे कपड़ो का नया होना।

कितना कठिन होता है ना? माँ होना।

याद है? अपनी इच्छाओं को माँ के ऊपर, थोप दिया करते थे।

इन्हें पूरा करने के अटल इरादों में ,झोंक दिया करते थे।

बेजान अंधेरे रास्तो पर माँ का समा होना।

कितना कठिन होता है ना? माँ होना।

तेरी यादें ले जाती है मुझे तन्हाइयों से दूर।

दुनिया की बेबुनियाद रुसवाईयों से दूर।

बस परेशान हूँ पर बदला नहीं हूँ माँ,

तूँ सोचती है ना? मेरा क्या से क्या होना।

कितना कठिन होता है ना? माँ होना।

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

June 24, 2022

 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा सुधीर श्रीवास्तव यह कैसी विडम्बना है कि हम सब जानते हैं मगर मानते

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

PreviousNext

Leave a Comment