Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

कविता – मोहन

कविता – मोहन मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारीअगाध अनन्त हुई कैसेप्रीत में पागल मीराबाईमन से सन्त हुई कैसे राधा ने …


कविता – मोहन

मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारी
अगाध अनन्त हुई कैसे
प्रीत में पागल मीराबाई
मन से सन्त हुई कैसे

राधा ने दुनियादारी त्यागी
और तुम्ही को साध लिया
निज प्रेम के अटूट सूत्र से
प्रेम से तुमको बांध लिया
तुमको प्रीत गोपियों से
बताओ भगवंत हुई कैसे
मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारी
अगाध अनन्त हुई कैसे

राधा को भी एक दिन
चुपके से तुम छोड़ गए
जिसके बिन तुम आधे थे
उससे रिश्ता तुम तोड़ गए
ग़र तुमने गलत किया ही नहीं
फिर ये बात ज्वलंत हुई कैसे
मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारी
अगाध अनन्त हुई कैसे

जरा बताओ क्या एक भी दिन
बिन मुरली के तुम रह पाए
जा रहा हूँ फिर से मिलूँगा मैं
क्या राधा से तुम कह पाए
तुम्हारे हृदय की भावनाएं
इतनी बलवंत हुईं कैसे
मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारी
अगाध अनन्त हुई कैसे

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

दोस्तों के नाम की शाम-सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

दोस्तों के नाम की शाम आइए!कुछ करते नहीं तो बस इतना करते हैं,एक शाम दोस्तों के नाम करते हैं,मौज मस्ती

सतत विकास-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

सतत विकास! करें गरीबी का निवारण, मिलकर बचाए पर्यावरण,हो समाज मैं आत्मनिर्भरता,बिना फर्क किए हो लैंगिक समानता! कोई व्यक्ति न

खुद को परख-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

खुद को परख! करके दिखा तू सोच मत, इतनी सी बात तू दिल में रख,जज्बा हो तुझ में जबरदस्त,खुद को

काश!!! बचपन के वह दिन लौट आएं

February 4, 2022

कविताकाश!!! बचपन के वह दिन लौट आएं बचपन के दिन कितने सुहाने थे काश कभी ऐसा करिश्मा भी हो जाए

बजट-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

बजट! अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय योजना,इसके जरिए यह है सरकार को सोचना,अपने राज्य की तुलना में,सरकार

माता-पिता-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

माता-पिता मेरे आदरणीय, प्यारे माता-पिताआपका प्रेम, मेरी जिंदगी है,आप दोनों ही, मेरी बंदगी है! आप ही मेरे माता-पिता हो, हर

Leave a Comment