Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

कविता – बचपन पुराना रे

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना …


 कविता – बचपन पुराना रे

सिद्धार्थ गोरखपुरी
सिद्धार्थ गोरखपुरी

ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे

पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना रे

बड़ी – बड़ी बातें हम खूब बतियाते थे

दोस्तों से मार खाते उनको भी लतियाते थे

हल्की सी चोट पर जोर से चिल्लाना रे

ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे

साइकिल की डंडी पर गमछा लगाते थे

बाबू जी आहिस्ते से उसपे बैठाते थे

घर और बाजार के बीच दुनियाँ दिखाना रे

ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे

साइकिल बाबू जी की लंगड़ी चलाते थे

कभी गिर जाते, कहीं जाके भिड़ जाते थे

साइकिल चलाने खातिर चोट का छिपाना रे

ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे

रोक – टोक कम थी कहीं भी चल जाते थे

जैसा माहौल मिला वैसे ढल जाते थे

अब तो हो पाता नहीं कभी मनमाना रे

ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे

सपने में ढेर सारे बिस्कुट और टाफी थी

गलती कुछ भी हो जाए मिल जाती माफ़ी थी

अब तो लग जाता है गलती पे जुर्माना रे

ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

राधा की पीड़ा चल केशव बरसाना जाना,रूठ गयी जहां राधा रानी ,वृंदावन को भूल गयी है ,अपनों से भी रूठ

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

देर लगेगी बदल गया जमाना है…. जरा देर लगेगीन कोई ठौर ठिकाना है…..जरा देर लगेगीतुम होते जो कुत्ते! तो लेते

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर

नई आस- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

नई आस बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आसहर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास

अलविदा- सुधीर श्रीवास्तव

January 6, 2022

अलविदा अब तुम जा रहे होन तनिक सकुचा रहे हो,लगता है बड़े बेशर्म हो गये हो।जाओ न हम भी कहां

जन्म सफल हो जायेगा-अंकुर सिंह

January 6, 2022

*जन्म सफल हो जायेगा* मिला मानव जीवन सबको, नेक कर्म में सभी लगाएं।।त्याग मोह माया, द्वेष भाव,प्रभु भक्ति में रम

Leave a Comment