Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhaskar datta, poem

कविता –औरत संघर्ष

कविता –औरत संघर्ष मेरी दोस्त! जब मैंने तुम्हें पढा़,तब मुझे एक जीवंत स्त्रीत्व का बीता हुआ कल स्मरण हो आया..राजनीतिक …


कविता –औरत संघर्ष

कविता –औरत संघर्ष

मेरी दोस्त! जब मैंने तुम्हें पढा़,
तब मुझे एक जीवंत स्त्रीत्व का बीता हुआ कल स्मरण हो आया..
राजनीतिक साहित्य&साहित्यिक राजनीति के सम्पूर्ण लोकोन्मुखी साहित्य में
वासनात्मक आँखें,
जो इस आकाँक्षा में निरत हैं कि उतरते कपडों में सराबोर कर दे ,
मेरी राक्षसी रूह को किसी बंद कमरे में।

और जो सवाल पैदा करती है बच्चों की तरह
अपनी अस्मिता रूपी देह को लेकर
तो क्या हम महसूस कर सकते हैं कि वह सचमुच स्वतंत्र है?
अस्तित्ववादी तन से,
मोहनी मन व सौंदर्य रूपी धन से…

नदी, औरतों को निर्भीकता का रंग रूट
प्रोवाइड कराती है
वो प्रवाहित होकर
जड़ताओं को नष्ट कर देती है …जिसमें वह वर्षों से जकड़ी थी…
अब उसे क्रास कर
हारने की प्रत्येक जंग को
जीतने का रणक्षेत्र बना रही है……

About author

भास्कर दत्त शुक्ल  बीएचयू, वाराणसी
भास्कर दत्त शुक्ल
 बीएचयू, वाराणसी


Related Posts

होली की फुहार- अनिता शर्मा झाँसी

March 25, 2022

होली की फुहार होली आई रे आई दिलों में छाई।गाओ रे गाओ खुशी के गीत गाओ।रंगों संग फुहार बरसे प्रियतम

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

Leave a Comment