Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

कविता -आधा

कविता -आधा जब भी इस दुनिया से मैं खुद को साझा करता हूँमानो लगता है मुझको के खुद को आधा …


कविता -आधा

जब भी इस दुनिया से मैं खुद को साझा करता हूँ
मानो लगता है मुझको के खुद को आधा करता हूँ

वैसे तो अपूर्ण है ही जीवन
बहुत कुछ अधूरा रहता है
तमाम ख्वाहिशें हैं मन में
कुछ आधा पूरा रहता है
सबको मुकम्मल करना है मैं खुद से वादा करता हूँ
जब भी इस दुनिया से मैं खुद को साझा करता हूँ
मानो लगता है मुझको के खुद को आधा करता हूँ

दुनिया की दुनियादारी में
खुद्दारी कहीं पे खोई है

चादर ओढ़ के एकांत में जाकर
गहरी नींद में सोयी है
ताउम्र खुद्दार रहने को मैं खुद को आमादा करता हूँ
जब भी इस दुनिया से मैं खुद को साझा करता हूँ
मानो लगता है मुझको के खुद को आधा करता हूँ

एकांत की चादर ओढ़ के अबतो
सो जाने का मन करता है
दुनिया से कोसो दूर कहीं
बस खो जाने का मन करता है
अब तो खुद ही बस मैं मोहब्बत ज्यादा करता हूँ
जब भी इस दुनिया से मैं खुद को साझा करता हूँ
मानो लगता है मुझको के खुद को आधा करता हूँ

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

मदर्स डे विशेष -माँ की दुआएं

May 6, 2022

मदर्स डे विशेष माँ की दुआएं घर से सफर करने निकलना हो । माँ को जहन में रख निकला करो

कविता-मां ही जन्नत

May 6, 2022

कविता-मां ही जन्नत न मैं मंदिर पुजू न मस्जिद और न ही गुरूद्वारा,मां के चरणों में ही समाई है देखो

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

May 6, 2022

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में

PreviousNext

Leave a Comment