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Jitendra_Kabir, poem

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र ‘कबीर’

करे कोई और भरे को खूब मुनाफा कमायाजिन लोगों नेअंधाधुंध खनन करकेनदियों और पहाड़ों में,इसके कारण हुएप्रकृति के कोप से …


करे कोई और भरे को

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र 'कबीर'

खूब मुनाफा कमाया
जिन लोगों ने
अंधाधुंध खनन करके
नदियों और पहाड़ों में,
इसके कारण हुए
प्रकृति के कोप से वो तो
सुरक्षित रहे बहुधा
दूर शहर के अपने मकानों में,
झेला हर बार
उन लोगों ने आपदाओं को
अपने ऊपर
जिनका इस कृत्य में कोई दोष ना था।
खूब मुनाफा कमाया
जिन सरकारों और कंपनियों ने
प्राकृतिक स्त्रोतों के जमकर
दोहन से,
इसके कारण हुए
प्रकृति के कोप से वो तो
सुरक्षित रहे बहुधा
दूर कहीं सुरक्षित प्रतिष्ठानों में,
झेला हर बार
उन लोगों ने आपदाओं को
अपने ऊपर
जिनका इस कृत्य में कोई दोष ना था।
जितेन्द्र ‘कबीर
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र 7018558314


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