Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, satyawan_saurabh

आज हम चांद पर है।

आज हम चांद पर है। सांप और साधुओं का देश कहा जाने वाला भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में दुनिया के …


आज हम चांद पर है।

आज हम चांद पर है।

सांप और साधुओं का देश कहा जाने वाला भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में दुनिया के ताकतवर देशों के साथ खड़ा है। भारत चंद्रयान-3 मिशन के साथ चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया है। चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान का रोवर चांद की सतह का अध्ययन करेगा और यह लैंडर के अंदर बैठकर गया है। लैंडर के मिशन की पूरी अवधि एक चंद्र दिवस की रहने वाली है, जो पृथ्वी के 14 दिन के बराबर है। पिछली बार क्रैश लैंडिंग हुई थी। पर इस बार अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद की सतह पर लैंड करने वाला चौथा देश बन गया है। ‘स्पेस के क्षेत्र में हमारी विशेषज्ञता में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। भारत के चंद्रयान-3 को सॉफ्ट लैंडिंग में सफलता से भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश तो बना ही है साथ ही दक्षिणी ध्रुव के इलाके में लैंडिंग कराने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

-डॉ सत्यवान सौरभ

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने आज चंद्रमा पर एक रोवर को उतारकर अंतरिक्ष अन्वेषण में एक शक्ति और अंतरिक्ष वाणिज्य की नई सीमा के रूप में देश के आगमन को चिह्नित किया है। 75 मिलियन डॉलर से कम के बजट पर निर्मित, चंद्रयान -3, जिसका संस्कृत में अर्थ है “चंद्रमा वाहन”, आज चांद पर है। अपनी पीठ पर चंद्रयान-3 आज 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों को साकार कर चुका है। चांद को चूमने पर ये उम्मीदें हर भारतीय के दिल में खुशी बनकर फूटी है। पूरा देश खुशियां मना रहा है। पिछली बार जो कसक रह गई थी, इस बार सब मंगल हुई। जी हां, आज हम चांद पर है। पूरे देश को बेसब्री से चंद्रयान की लैंडिंग का इंतजार था वो खत्म हुआ।

मिशन की सफलता से भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, पूर्व सोवियत संघ और चीन वाले देशों के एक छोटे समूह में शामिल हो गया है, जिन्होंने चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की है। इस साल की शुरुआत में एक जापानी स्टार्ट-अप का प्रयास ऊंचाई की गलत गणना के कारण लैंडर के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ समाप्त हुआ, जिसका मतलब था कि अंतरिक्ष यान का ईंधन खत्म हो गया था। स्पेसआईएल और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) द्वारा निर्मित एक इज़राइली अंतरिक्ष यान भी इस साल की शुरुआत में चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। 2020 में चंद्रयान-2 मिशन में एक ऑर्बिटर को सफलतापूर्वक तैनात करने के बाद भारत का अंतरिक्ष उद्योग इस मिशन से मुक्ति की तलाश से, लैंडर और रोवर को उतारने में सफल हुए। चंद्रयान-2 मिशन को स्थायी रूप से छाया वाले चंद्रमा के क्रेटर का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। ऐसा माना जाता है कि इसमें पानी का भंडार है जिसकी पुष्टि 2008 के पहले चंद्रयान-1 मिशन से हुई थी – जिसने चंद्रमा की कक्षा तो ली लेकिन उतरा नहीं।

इस बार सब योजना के अनुसार हुआ, चंद्रयान -3 में 2-मीटर (6।5-फुट) लंबा लैंडर शामिल है जिसे चंद्रमा के पास एक रोवर तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। दक्षिणी ध्रुव जहां पानी की बर्फ पाई गई है। उम्मीद है कि प्रयोगों की एक श्रृंखला चलाने के बाद रोवर दो सप्ताह तक कार्यशील रहेगा। चंद्रयान-3 का लैंडर और रोवर चांद की सतह पर उतरने के बाद अपने मिशन का अंजाम देने के लिए सौर्य ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। चांद पर 14 दिन तक दिन और अगले 14 दिन तक रात रहती है, अगर चंद्रयान ऐसे वक्त में चांद पर उतरेगा जब वहां रात हो तो वह काम नहीं कर पाएगा। इसरो सभी चीजों की गणना करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि 23 अगस्त से चांद के दक्षिणी ध्रुव सूरज की रौशनी उपलब्‍ध रहेगी।

इसरो सभी चीजों की गणना करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि 23 अगस्त से चांद के दक्षिणी ध्रुव सूरज की रौशनी उपलब्‍ध रहेगी। वहां रात्रि के 14 दिन की अवधि 22 अगस्त को समाप्त हो रही है। 23 अगस्त से 5 सितंबर के बीच दक्षिणी ध्रुव पर धूप निकलेगी, जिसकी मदद से चंद्रयान का रोवर चार्ज हो सकेगा और अपने मिशन को अंजाम देगा।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण और संबंधित उपग्रह-आधारित व्यवसायों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतियों की घोषणा के बाद से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा लॉन्च देश का पहला बड़ा मिशन है। 2020 के बाद से, जब भारत निजी लॉन्च के लिए खुला, अंतरिक्ष स्टार्ट-अप की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। भारत ने, हाल के वर्षों में, खुद को वाणिज्यिक अंतरिक्ष संचालन के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में मजबूत किया है, जिसमें नवंबर 2022 में प्रारंभ नामक मिशन के हिस्से के रूप में अपने पहले निजी तौर पर विकसित रॉकेट, विक्रम-एस का प्रक्षेपण भी शामिल है, जिसका अर्थ है शुरुआत।

भारत चाहता है कि उसकी अंतरिक्ष कंपनियां अगले दशक के भीतर वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में अपनी हिस्सेदारी पांच गुना बढ़ा लें, जो 2020 में राजस्व के मामले में 2 प्रतिशत से अधिक है। भारत छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने में अनुभवी है और इस बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। खुद को उपग्रह प्रक्षेपण सुविधा के रूप में पेश करना है, भारत ने यूके स्थित उपग्रह कंपनी वनवेब के लिए 36 इंटरनेट उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है। “भारत अंतरिक्ष को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखता है और इसका लक्ष्य बाहरी अंतरिक्ष में अग्रणी खिलाड़ियों में से एक बनना है।” “यह भारत के लिए इस उद्योग में अग्रणी बनने का अवसर हो सकता है।”

सांप और साधुओं का देश कहा जाने वाला भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में दुनिया के ताकतवर देशों के साथ खड़ा है। भारत चंद्रयान-3 मिशन के साथ चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया है। चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान का रोवर चांद की सतह का अध्ययन करेगा और यह लैंडर के अंदर बैठकर गया है। लैंडर के मिशन की पूरी अवधि एक चंद्र दिवस की रहने वाली है, जो पृथ्वी के 14 दिन के बराबर है। पिछली बार क्रैश लैंडिंग हुई थी। पर इस बार अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद की सतह पर लैंड करने वाला चौथा देश बन गया है। ‘स्पेस के क्षेत्र में हमारी विशेषज्ञता में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। भारत के चंद्रयान-3 को सॉफ्ट लैंडिंग में सफलता से भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश तो बना ही है साथ ही दक्षिणी ध्रुव के इलाके में लैंडिंग कराने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

About author

Satyawan Saurabh

डॉo सत्यवान ‘सौरभ’
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045
facebook – https://www.facebook.com/saty.verma333
twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh


Related Posts

विज़न 2047 – आकांक्षा 47 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था

March 6, 2023

 विज़न 2047 – आकांक्षा 47 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था  एशिया आर्थिक संवाद के सातवें संस्करण 23-25 फ़रवरी 2023 में दिखा भारत

अपराध और अपराधियों के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति ज़रूरी

March 6, 2023

डर अच्छा लगता है अपराध और अपराधियों के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति ज़रूरी बुलडोज़र, इनकाउंटर, त्वरित एक्शन के डर ने

क्यों झेल रही निराशा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा?

March 6, 2023

क्यों झेल रही निराशा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा? आशा कार्यकर्ता अपने निर्दिष्ट क्षेत्रों में घर-घर जाकर बुनियादी पोषण, स्वच्छता प्रथाओं और

आधुनिकता वरदान या अभिशाप

March 5, 2023

 आधुनिकता वरदान या अभिशाप प्रगति सब ही क्षेत्र में आवकारदाय है।प्रहलें हम पैदल या बैल गाड़ियों,घोड़ा गाड़ियों आदि में प्रवास

हमे सुंदर घर बनाना तो आता है, पर उस घर में सुंदर जीवन जीना नहीं आता

March 5, 2023

J. krishnamurti  हमें सुंदर घर बनाना तो आता है, पर उस घर में सुंदर जीवन जीना नहीं आता बीसवीं सदी

महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं विश्व बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ एस अनुकृति

March 5, 2023

 महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं विश्व बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ एस अनुकृति  अपनी शिक्षा के दौरान भारत सरकार

PreviousNext

Leave a Comment