Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem, vyang

अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है| absent rahta hun par haziri lagti hai

यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय ऑफिस में कर्मचारी ड्यूटी पर होकर भी राउंड के बहाने कैसे घूमते फिरते, बाहरगांव जाते, ऑफिस …


यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय ऑफिस में कर्मचारी ड्यूटी पर होकर भी राउंड के बहाने कैसे घूमते फिरते, बाहरगांव जाते, ऑफिस ड्रेस में निजी काम करते हमको दिखते हैं। अब्सेंट रहते हैं परंतु फ़िर भी हाजिरी लगती है। इसपर आधारित है 

व्यंग्य कविता-अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है

शासकीय कर्मचारी हूं निजी काम बहुत रहते हैं
चालू ऑफिस में छुट्टी करता हूं सेटिंग है
मशीन में अंगूठा भी लगता है डिजिटल है
अप्सेंट रहता हूं पर हाजरी लगती है

टेबल पर जानबूझकर फाइलें फैला देता हूं
बाजू वाला बोल देता है बाबू राउंडपर हैं
रोब जमानें कहता हूं साहब की केबिन में हूं
अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है

घर के बहुत अर्जेंट काम रहते हैं
रिश्तेदारी में भी आनाजाना लगा रहता है
हम सब हमाम में वो हैं सेटिंग चलती है
अप्सेंट रहता हूं पर हाजरी लगती है

मैं अकेला नहीं सब करतेहैं सेटिंग चलती है
साहब ख़ुद भी करते हैं झूठे राउंड चलते हैं
किसी को पता नहीं चलता सब समझते हैं
अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है

सरप्राइस चेकिंग में टांग भी फंसती है
फ़िर भी धीरे से सेटिंग होती है
जनता को दिखाने बोगस केस होते हैं
अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

अनेकता में एकता की नगर चौरासी-अक्षय भंडारी

March 26, 2022

अनेकता में एकता की नगर चौरासी अनेकता में एकता की नगर चौरासीहम सुनाते है एक ये प्यारी बात,ये है हमारी

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

March 26, 2022

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली।

अच्छे के लिए होता है !

March 26, 2022

अच्छे के लिए होता है ! राजा और मंत्री शिकार के लिए निकले, जंगल में आए, बहुत सारी झाड़ी और

दयावान बने!

March 26, 2022

दयावान बने! सोए हुए शेर के ऊपर चढ़ा चूहा,शेर उठा और हुआ आग बबूला,गुस्से में कहा, तुम्हें कौन बचाएगा,यह खूंखार

अजय प्रसाद की रचनाएं

March 26, 2022

अजय प्रसाद की रचनाएं  हमसे हमारे ख्वाब न छीन काँटों भरी गुलाब न छीन ।जिंदा तो हूँ गफलत में सहीयादों

मेरा मन है एक बंजारा- वीना आडवाणी तन्वी

March 26, 2022

मेरा मन है एक बंजारा मेरा मन है एक बंजारा स्थिर नहीं ये फिरता मारामाराकभी प्राकृतिक सौंदर्य में फिरेतो कभी

Leave a Comment