Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, lekh

अपेक्षा और हम- अनिता शर्मा झाँसी

अपेक्षा और हम हर रिश्ता सुन्दर प्यारा सा है।हमारे अपने दिल के करीब रहते हैं।सभी प्यारी भावनाओं से जुड़े रहते …


अपेक्षा और हम

अपेक्षा और हम- अनिता शर्मा झाँसी

हर रिश्ता सुन्दर प्यारा सा है।हमारे अपने दिल के करीब रहते हैं।सभी प्यारी भावनाओं से जुड़े रहते हैं।पर….
कभी-कभी हम उनको समय ही नहीं देते कि वे अपने निर्णय लेकर अपनी जिंदगी जियें।आज के दौर में अगर बात करे परिवार की तो माता पिता अपने बच्चों पर अपनी आशाओ और अपेक्षाओ को जाने अनजाने उन पर थोप रहे।जिसका सीधा असर बच्चे की भावना मन-मस्तिष्क पर पड़ता हैं।और वह कुंठाग्रस्त हो जाता है।जो क्षमता उसके अंदर है वह भी अपेक्षाओ के बोझ तले दब कर रह जाती है।
क्यों न बच्चे का स्वभाविक विकास करें,उसकी क्षमताओ को विकसित होने दे तब उन क्षमताओ के विकास मे योगदान दे।
यदि दूसरी ओर नजर डालें तो पायेंगे पति पत्नी से बहुत सी अपेक्षाए रखता है और पत्नी पति से।ठीक यहीं से रिश्तों में दरार खटास आने लगती है मनमुटाव फालतू के झगड़े जन्म लेते हैं।सौहार्दपूर्ण सामन्जस्य की आज के दौर में परम आवश्यकता है।
अब बात करते है ससुराल में बहु से अपेक्षाओ के दौर की……..
एक नयी नवेली दुल्हन ससुराल में कदम ही रखती है कि उस पर चौतरफा अपेक्षाओ का पहाड़ टूट पड़ता है।सास की अपनी अपेक्षाए,नंन,जिठानी और पति ।
सभी की अपेक्षाए पनपने लगती है और जो लाड प्यार में पली दबकर घुटकर रह जाती है।
अब बात करे आर्थिक रूप से परिवारिक सदस्यों की अपेक्षाओं की तो लेना सब चाहते देना कोई नहीं।यदि किसी एक सदस्य ने उन्नति कर ली तो अपेक्षा शुरू हो जाती है और यदि पूरी न हो पाई तो ईर्ष्या द्वेष छींटा कशी का दौर शुरू हो जाता है।सारा दोषारोपण बड़े आदमी पर….. घमंडी अंहकारी इत्यादि।
जीवन को सरलता से भी जिया जा सकता है।अपेक्षा को स्वयं से दूर रखकर।स्वयं पर विश्वास रखकर।आत्मोन्नति के मार्ग पर कठिन परिश्रम से।
जीवन हमारा है हम क्यों इसे अपेक्षा-उपेक्षा के दलदल में फंसाकर कीचड़ में गिरे।हम मन के विचारों को संयत रखकर शान्ति से रहें और परिवार समाज का वातावरण सुखमय बनाये।
याद रहे अपेक्षा ही उपेक्षा की जननी है।।।

अनिता शर्मा झाँसी


Related Posts

अंतरात्मा की आवाज बताती – क्या सही है और क्या गलत है?

June 29, 2023

अंतरात्मा की आवाज बताती – क्या सही है और क्या गलत है? अंतरात्मा स्वभाव से सत्य का प्रतिनिधित्व करती है

महिलाओं से आकाश छीनता पितृसत्ता विश्वास

June 29, 2023

महिलाओं से आकाश छीनता पितृसत्ता विश्वास पितृसत्तात्मक समाज औरत को स्वतंत्रता और फैसला लेने का अधिकार नहीं देता। यह समाज

साहित्य जगत मंचों पर संस्थापकों की चाल- साहित्यकाराओं का शोषण

June 29, 2023

साहित्य जगत मंचों पर संस्थापकों की चाल- साहित्यकाराओं का शोषण सही कह रही हूं, शब्द बहुत ही कड़वे हैं मेरे

ठहाकों के बीच मदमस्त होते संग पेड़ ये बहारें- योग

June 29, 2023

ठहाकों के बीच मदमस्त होते संग पेड़ ये बहारें- योग रोज़मर्रा की ये आम सी जिंदगी, कभी-कभी इतनी बोझिल और

जितना अधिक इच्छाओं का दिया बलिदान- उतने अधिक बढ़े वृद्धाश्रम

June 29, 2023

जितना अधिक इच्छाओं का दिया बलिदान- उतने अधिक बढ़े वृद्धाश्रम कामख्या पीठ एवम हरिद्वार के आध्यात्मिक गुरु श्री प्रताप सिंह

दृढ़ता और संतोष, खुशियों के स्त्रोत

June 29, 2023

दृढ़ता और संतोष, खुशियों के स्त्रोत मनुष्य के रूप में हम उस पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो हमारे पास

PreviousNext

Leave a Comment