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zindagi par kavita | बोलती जिंदगी

बोलती जिंदगी  बोलती जिंदगी ,मौन होकर के सुन || सप्त स्वर सुन मचलने लगे सब के दिल, किस की पायल …


बोलती जिंदगी 

zindagi par kavita | बोलती जिंदगी
बोलती जिंदगी ,मौन होकर के सुन ||
सप्त स्वर सुन मचलने लगे सब के दिल,
किस की पायल से निकली मुहब्बत की धुन ||
सृष्टि उपवन खिला पुष्प ही पुष्प हैं,कुछ बिखेरें सुरभि कुछ अभी सुप्त हैं||
देखिए फूल हैं अनगिनत सृष्टि में,देखने के लिए ये सभी मुफ्त हैं||
देखिए प्यार से प्यार से सूंघिए,फूल को तोड़ना तो महा पाप है||
मान जा मान जा मूर्ख अब मान जा,दर्द देना किसी को भी अभिशाप है||
सींच जीवन लता ना कोई जुल्म ढा,कर घृणित कार्य तू हाय कलियां ना चुन||
बोलती जिंदगी मौन होकर के सुन||
सृष्टि में जीव सब पर तू इन्सान है,देख तेरी दशा रूठा भगवान है||
यों ना उत्पात कर बज्र का वार कर,देख शैतान भी तुझको हैरान है||
हर जगह शोरगुल चीखती है धरा ,किसने ना जाने किस को किया अधमरा ||
बांधती ही रही जिंदगी के लिए,सभ्य लोगो तिहारी ये कैसी सरा ||
त्याग स्वारथ का कर फिर जरा प्यार कर,देंगे तुझको दिखाई यहां गुन ही गुन ||
बोलती जिंदगी मौन होकर के सुन||
जिंदगी को समझने को है जिंदगी,जिंदगी जिन्दा रख सीखकर वंदिगी||
पीने वालो पियो खूब जीभर पियो, पर पियो सीखकर ऐ मधुर रिन्दगी||
और भी रस भरे कितने सागर यहां,हो आनन्दित है आनन्द ही यह जहां ||
भाग ना छोड़ मरुभूमि ही दूर तक,तेरी मृगतृष्णा जाये लिये कब कहाँ||
जल रहा दिल जले जैसे ज्वालामुखी,रूह सदियों से दिल संग रही हाय भुन||
बोलती जिंदगी मौन होकर के सुन||

About author 

Madhukavi Rakesh madhur

मधुकवि राकेश मधुर

गांव-चाबरखास
तहसील–तिलहर
जनपद-शाहजहांपुर यू पी

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