Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Rakesh madhur

zindagi par kavita | बोलती जिंदगी

बोलती जिंदगी  बोलती जिंदगी ,मौन होकर के सुन || सप्त स्वर सुन मचलने लगे सब के दिल, किस की पायल …


बोलती जिंदगी 

zindagi par kavita | बोलती जिंदगी
बोलती जिंदगी ,मौन होकर के सुन ||
सप्त स्वर सुन मचलने लगे सब के दिल,
किस की पायल से निकली मुहब्बत की धुन ||
सृष्टि उपवन खिला पुष्प ही पुष्प हैं,कुछ बिखेरें सुरभि कुछ अभी सुप्त हैं||
देखिए फूल हैं अनगिनत सृष्टि में,देखने के लिए ये सभी मुफ्त हैं||
देखिए प्यार से प्यार से सूंघिए,फूल को तोड़ना तो महा पाप है||
मान जा मान जा मूर्ख अब मान जा,दर्द देना किसी को भी अभिशाप है||
सींच जीवन लता ना कोई जुल्म ढा,कर घृणित कार्य तू हाय कलियां ना चुन||
बोलती जिंदगी मौन होकर के सुन||
सृष्टि में जीव सब पर तू इन्सान है,देख तेरी दशा रूठा भगवान है||
यों ना उत्पात कर बज्र का वार कर,देख शैतान भी तुझको हैरान है||
हर जगह शोरगुल चीखती है धरा ,किसने ना जाने किस को किया अधमरा ||
बांधती ही रही जिंदगी के लिए,सभ्य लोगो तिहारी ये कैसी सरा ||
त्याग स्वारथ का कर फिर जरा प्यार कर,देंगे तुझको दिखाई यहां गुन ही गुन ||
बोलती जिंदगी मौन होकर के सुन||
जिंदगी को समझने को है जिंदगी,जिंदगी जिन्दा रख सीखकर वंदिगी||
पीने वालो पियो खूब जीभर पियो, पर पियो सीखकर ऐ मधुर रिन्दगी||
और भी रस भरे कितने सागर यहां,हो आनन्दित है आनन्द ही यह जहां ||
भाग ना छोड़ मरुभूमि ही दूर तक,तेरी मृगतृष्णा जाये लिये कब कहाँ||
जल रहा दिल जले जैसे ज्वालामुखी,रूह सदियों से दिल संग रही हाय भुन||
बोलती जिंदगी मौन होकर के सुन||

About author 

Madhukavi Rakesh madhur

मधुकवि राकेश मधुर

गांव-चाबरखास
तहसील–तिलहर
जनपद-शाहजहांपुर यू पी

Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment