Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

zindagi ka wada by Abhilekha Ambasth Gazipur

शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा,  कहीं धूप कहीं छाया,  बस यही …


शीर्षक-
जिंदगी का वादा

कहीं कम तो कहीं ज्यादा,

बस यही है जिंदगी का वादा, 
कहीं धूप कहीं छाया,
 बस यही जिंदगी का फ़साना, 
कहीं रुप तो कहीं रंग, 
बस यही है जिंदगी का ढंग,
 कहीं पतंग तो कही धागा, 
बस यही है जिन्दगी का वादा
 कहीं धूप तो कहीं सुहाना, 
बस यही है जिंदगी का तराना, 
कहीं बंध तो कहीं अनुबंध,
 बस यही है जिंदगी का निबंध, 
कहीं फूल तो कहीं कांटा , बस यही है जिंदगी का चांटा
 कहीं चांद तो कहीं,सूरज, 
बस यही है जिंदगी की सूरत, 
कहीं लेख तो कहीं अभिलेख, 
बस यही है जिन्दगी का प्रतिलेख अभिलेखा अम्बष्ट , 
स्वरचित गाजीपुर उत्तर प्रदेश

Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment