Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

zindagi ka wada by Abhilekha Ambasth Gazipur

शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा,  कहीं धूप कहीं छाया,  बस यही …


शीर्षक-
जिंदगी का वादा

कहीं कम तो कहीं ज्यादा,

बस यही है जिंदगी का वादा, 
कहीं धूप कहीं छाया,
 बस यही जिंदगी का फ़साना, 
कहीं रुप तो कहीं रंग, 
बस यही है जिंदगी का ढंग,
 कहीं पतंग तो कही धागा, 
बस यही है जिन्दगी का वादा
 कहीं धूप तो कहीं सुहाना, 
बस यही है जिंदगी का तराना, 
कहीं बंध तो कहीं अनुबंध,
 बस यही है जिंदगी का निबंध, 
कहीं फूल तो कहीं कांटा , बस यही है जिंदगी का चांटा
 कहीं चांद तो कहीं,सूरज, 
बस यही है जिंदगी की सूरत, 
कहीं लेख तो कहीं अभिलेख, 
बस यही है जिन्दगी का प्रतिलेख अभिलेखा अम्बष्ट , 
स्वरचित गाजीपुर उत्तर प्रदेश

Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment