शीर्षक-
जिंदगी का वादा
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा, कहीं धूप कहीं छाया, बस यही …
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
February 7, 2022
मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी
February 7, 2022
बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक
February 6, 2022
जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव
February 6, 2022
नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद
February 6, 2022
गाँधी जी तुम्हें प्रणाम हे बापू हे राष्टृपिता संत साबरमती केपुजारी अहिंसा केतुम्हें नमन हैकोटि कोटि प्रणाम है।देश में आज
February 6, 2022
दोस्तों के नाम की शाम आइए!कुछ करते नहीं तो बस इतना करते हैं,एक शाम दोस्तों के नाम करते हैं,मौज मस्ती