Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Zindagi jal Dhar Jaisi by hare Krishna Mishra

 जिंदगी जल धार जैसी जिंदगी के हर मोड़ पर, हम अधुरे ही रहे , चल रहा था दो चार कदम, …


 जिंदगी जल धार जैसी

Zindagi jal Dhar Jaisi by hare Krishna Mishra

जिंदगी के हर मोड़ पर,

हम अधुरे ही रहे ,

चल रहा था दो चार कदम,

रुक क्यों गए हम ?

वह चली जल धार जैसी,

पावन सलिल आंचल लिए,

देखता तट पर अकेला ,

भाव विहव्ल हम रहे.  ।।

भमर के बीच फंस गया हूं ,

मजधार में बाधित हुआ हूं,

संक्षिप्त जीवन है हमारी ,

काश मुझको साथ देती   ।।

गर साथ मुझे तू दे न सको ,

दर्द मुझे अपना दे दो ,

जीवन में हम तो साथ रहे

मनुहार भरा जीवन दे दो   ।।

जाने अनजाने पथ पर ,

चलना बहुत कठिन है,

ले चल मुझे सहारा देकर,

मैं हूं तेरे पीछे। ।।

दूर-दूर तक दिशा न दिखती,

अवलंब   न  मेरा  कोई  ,

दूर हमें चलना है कितना,

ज्ञात नहीं है मुझको।    ।

आश भरा जीवन होता है,

नैराश्य कामना करता कौन  ?

साथ तुम्हारा पाने को ,

आतुर होगा मेरा मन।    ।।

किस पथ पर पाऊंगा तुझको ,

ज्ञात नहीं अब तक मुझको ,

बता सहारा किससे पाऊं ,

हार गया हूं जीवन में   ।।

मौलिक रचना

                    डॉ हरे कृष्ण मिश्र

                    बोकारो स्टील सिटी

                    झारखंड ।


Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment