Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Zindagi choti kahani bandi by Kashmira singh

 जिंदगी छोटी कहानी बड़ी । हमारे चारो तरफ कहानियों का जाल सा फैला हुआ है । यह दीवार पर टँगी …


 जिंदगी छोटी कहानी बड़ी ।

Zindagi choti kahani bandi by Kashmira singh

हमारे चारो तरफ कहानियों का जाल सा फैला हुआ है । यह दीवार पर टँगी पेंटिंग नहीं है बल्कि एक जीती-जागती तस्वीर है जो एक आवाज पर फ्रेम से निकल कर हमारे सामने खड़ी हो जाएगी । रात मेरे सपने में आ गई । मैंने पूछा , क्या तुम्हारे पति एक आँख से नहीं देख पाते ? उसने कहा नहीं , दोनों आंखों से भी नहीं देखें तो क्या ? मैं गाँधारी नहीं बन सकती ! मैं स्त्री हूँ ! सृजन का दुःख सुख दोनों सहेज सकती हूँ किन्तु ……..! किन्तु क्या ……..? एक अजीब सी खामोशी थी मेरे और उसके बीच । टप……. टप ……टप की आवाज निस्ब्धता को भंग कर रही थी । मैं उसके करीब गई ……उसे गले से लगाया ……बर्फ की तरह ठंडी औरत किसी प्रेतात्मा की तरह कंधे पर झूल गई । उफ्फ……. वेदना की बर्फ मेरे कंधे के संवेदना की गर्मी से पिघलने लगी और वह फूट-फूट कर रो पड़ी ……! नि : शब्द रात्रि में रूदन की आवाज ……. एक कहानी सुना रही थी । 

शादी….जो दो शरीर के मिलन का माध्यम है …..वही दो आत्माओं की दूरी का कारण भी बन जाता है । प्रेतात्मा अब सिसक रही थी । मैंने पानी का ग्लास उसकी ओर बढाया । अब वह शांत थी । उसके भीतर का द्वन्द्व मेरी बेचैनी बढा रहे थे । वह कहने के लिए सूत्र ढूँढ रही थी । मैंने दीवार पर टँगी उसकी तस्वीर उसे दिखाई और वह एकदम से चैतन्य हो गई । 

हाँ ……यह मैं ही हूँ …… एक स्त्री ……जिसे दीवारों में इस तरह जकड़ दिया गया है कि उसे भोर का सूरज और दिन की तपन का फर्क मालूम न हो…….बाहर शोर है या शांति इसका पता न चल सके ……. फूलों के वे रंग जो बचपन में उसने तितलियों को पकड़ते हुए देखा था ……. उसे अब याद नहीं ! वह बस एक ही आवाज पहचानती है ………खाना लाओ ……. बिस्तर पर आओ । 

इससे अच्छा तो कारागार है जहाँ के बंदियों को परिजनों से मुलाकात भी कराया जाता है । एक वह है कि अपने ही घर में कैद है ……..! ऐसा नहीं कि वह अनाथालय में पली बढी है…… ऐसा नहीं कि उसने स्कूल कॉलेज का मुँह नहीं देखा है ….! ऐसा नहीं कि उसे सखियाँ सहेलियाँ नहीं थी ……..। सबकुछ होते हुए भी आज कुछ नहीं है । पति हैं …….दो प्यारे बच्चे हैं लेकिन जो होना चाहिए वही तो नहीं है । शक की भोथरी तलवार प्रेम के इतने टुकड़े कर चुकी है कि उसे किसी फेवीक्विक से जोड़ा नहीं जा सकता । 

अब वह एक जिंदा लाश है ……..! सक्रिय मस्तिष्क और बेजान जिस्म …….! सुनोगे तो मुहब्बत करने लगोगे ………! इसलिए वह फ्रेम में जड़कर दीवार पर टँग गई है ………! ज़रूरत पड़े तो उतार लेना …….. इच्छापूर्ति कर लेना …….वह फिर दीवार पर टँग जाएगी ……! हाँ वह एक औरत है ……!

कश्मीरा सिंह ।


Related Posts

इंडिया बनाम भारत | India vs bharat

September 7, 2023

इंडिया बनाम भारत – भारत की बात बताता हूं भारतीय संविधान में इंडिया, दैट इज भारत का पहले से ही

Teacher’s day 5 september special

September 4, 2023

शिक्षक दिवस 5 सितंबर 2023 पर विशेष शिक्षक मानवीय व्यक्तित्व निर्माता हैं इसलिए अपनी शिक्षण क्षमताओं में विकास और छात्रों

आध्यात्मिक जीवन अपनाकर दिव्य आनंद के द्वार खोलें

September 2, 2023

वैज्ञानिक विज्ञान वस्तु भोग के दलदल में डालता है और आध्यात्मिक हमें बाहर निकलता है आओ आध्यात्मिक जीवन अपनाकर दिव्य

भारत का सर्वजन सुखिनों भवन्तु में विश्वास

September 2, 2023

भारत का सर्वजन सुखिनों भवन्तु में विश्वास भारतीय सभ्यता संस्कृति का निर्मल भाव विश्व के सभी प्राणी सुखी, निरोगी, मित्रता

शब्दों की नग्नता ढ़ांकने का सर्वोच्च अदालत का प्रयास

August 31, 2023

शब्दों की नग्नता ढ़ांकने का सर्वोच्च अदालत का प्रयास स्त्री जन्म से ही स्त्री नहीं होती, उसे स्त्री बनाया जाता

जीव का जीवन ही कृषि पर आधारित है

August 31, 2023

जीव का जीवन ही कृषि पर आधारित है मानव का भाग्य और भविष्य जल, भूमि, मिट्टी इन प्राकृतिक संसाधनों के

PreviousNext

Leave a Comment