Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Yun he nhi ye tiranga mahan hai by Tabrez Ahmad

यूं ही नहीं ये तिरंगा महान है। यूं ही नहीं ये तिरंगा महान है।यही तो मेरे देश की पहचान है।हो …


यूं ही नहीं ये तिरंगा महान है।

Yun he nhi ye tiranga mahan hai by Tabrez Ahmad

यूं ही नहीं ये तिरंगा महान है।
यही तो मेरे देश की पहचान है।
हो गए कितने ही प्राण न्यौछावर इसके सम्मान में,
आज भी इस तिरंगे के लिए सबकी एक हथेली पर जान है।
मेरे दिलो जिस्मों जान से ये सदा आती है,
ये तिरंगा ही तो मेरा ईमान है।
मिट गए देश के खातिर कैसे -कैसे देश भगत यहाँ,
गांधी,तिलक,सुभाष व जवाहर जैसे फूल इस तिरंगे की पहचान है।
भूला नहीं सकता कभी ये देश इन वीर जवानों को,
भगत सिंह,राज गुरु,सुखदेव जैसे वीर जवान इस तिरंगे के लिए हुए कुर्बान है।
घटा अमृत बरसाती है , फिज़ा गीत सुनाती है, धरा हरियाली बिछाती है,
कई रंग कई मज़हब के होकर भी सबके हाथो में, एक ही तिरंगा और सबकी ज़ुबान पर एक ही गान है।
उत्साह की लहर शांति की धारा बहाती है नदियां,
हम भारतीय की पहचान बताती ये धरती सुनहरी नीला आसमान है।
करते है वतन से मुहब्बत कितनी ना पूछो हम दीवानों से,
वतन के नाम पर सौ जान भी कुर्बान है।
एक ही तिरंगे के साये में कई तरह के फूल खिलते व खुशबू महकती है,
रंग,नस्ल, जात, मज़हब भिन्न- भिन्न होकर भी एक ही धरा के हम बागबान है।
लिखी जाती है मुहब्बत की कहानियां पूरी दुनिया में,
मगर मुहब्बत का अजूबा ताज को बताकर मिलता हिंदुस्तान को स्वाभिमान है।
ज़मी तो इस दुनिया में बहुत है पैदा होने के लिए,
“तबरेज़” तू खुशनसीब है जिस ज़मी पर पैदा हुआ वो हिंदुस्तान है।

तबरेज़ अहमद
बदरपुर नई दिल्ली


Related Posts

मुहब्बत जालिम – डॉ इंदु कुमारी

January 15, 2022

मुहब्बत जालिम किसी की नहीं होती हैजालिम मुहब्बत ये हैबड़ी मगरुर होती हैबड़ी मशहूर होती है बाँधो चाहे पैरों में

फसलों के त्योहार – डॉ इंदु कुमारी

January 15, 2022

फसलों के त्योहार मकर संक्रांति हम मनाएं गुड़ तिल चावल चढ़ाएंदही चूड़ा गुड़ केला खाखिचड़ी के भोग लगाएंमिलकर खुशी हम

युवा शक्ति जागो रे- मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी “

January 15, 2022

“युवा शक्ति जागो रे” जागो- जागो , जागो रे जागो सेवा का हथियार हाथ में“मुझको नही तुझको “के नारे सेदुखियों

राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 15, 2022

 राजनीति भी अजीब  है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी

मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा- R.S.meena Indian

January 15, 2022

कविता -मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा मिल जाये गर रहबर ,हर बात छोड़ दूँगा । कह दूं सोहबतों से, मैं

शोषण- चन्दानीता रावत

January 15, 2022

शोषण जागो मानव के मन, जागोशोषण के विरूद्ध चुपी तोडो़समाज के काले विचारों सेरिश्ता तोडो़, दो जवाब मुड़ कर इनरुढ़िवादी

Leave a Comment