Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

You can do anything

“You can do anything” आजकल की युवा पीढ़ी को ज़िंदगी संघर्षों का पिटारा लगती है, प्रतियोगिता के ज़माने में खुद …


“You can do anything”

You can do anything

आजकल की युवा पीढ़ी को ज़िंदगी संघर्षों का पिटारा लगती है, प्रतियोगिता के ज़माने में खुद को कौनसे ट्रैक पर चलना है उसके लिए असमंजस में रहते अवसाद का भोग बन जाते है बच्चें। आजकल एक शब्द डिप्रेशन बहुत आम बन गया है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक में ये मानसिक रोग पनपता नज़र आ रहा है। हर क्षेत्र में कंपिटीशन बच्चों को आहत कर देती है। 95/98 प्रतिशत लाना हर किसीके बस की बात नहीं यह बात अभिभावकों को भी समझनी होगी, देखादेखी में बच्चों पर दबाव मत डालिए। इस दबाव के चलते पढ़ाई बोझ बनती जा रही है। पर समझदारी से ज़िंदगी को हल्के में लेते अपनी क्षमता के हिसाब से आगे बढ़ेंगे तो हर राह आसान लगेगी।
“हालात बदलने के लिए दो हाथ, हौसला और एक दिमाग काफ़ी है” बस इसका सही इस्तेमाल सीख लो।
“नहीं है जग में बंदे कुछ भी नामुमकिन हाथों को हथियार बना, हिम्मत को पतवार, हौसलों के दम से कर ले जीवन नैया पार” self motivation को समझो, अपने हुनर को पहचानों और अपनी उर्जा को जगाओ। खराब वक्त को कोसो मत वक्त का काम है बदलना ज़िंदगी का काम है हमारे आगे चुनौतियों को रखना परिस्थितियों को हर हाल में संभालना हमारा काम है। हार को नेमत समझो, यह हार ही आपको और मेहनत करने का पर्याय देती है।
‘माँझी’ फ़िल्म में पहाड़ को खोदकर, तराशकर रास्ता बनाने वाला इंसान कहता है की कब तक ईश्वर के भरोसे बैठे रहेंगे, क्या पता ईश्वर हमारे भरोसे बैठा हो। कृष्ण सबके साथ है, बस भीतर के अर्जुन को जगाओ। कृष्ण राह दिखाता है पर गांडिव तो आपको ही उठाना होगा। निराशा को स्वीकार करने से बड़ी कोई हार नहीं। उपर उठने के लिए आत्मविश्वास जगाना होगा।
आत्मविश्वास की पूँजी से हालात बदलते है।
कर्म करते जाओ इंसान का दिमाग शक्ति और सामर्थ्य का भंडार है, उसका उपयोग सीख जाओ। जवानी के दस साल ज़िंदगी आपसे मांगती है, पूरे होशोहवास में कड़ी मेहनत से पसीना बहाकर हंसी खुशी वो दस साल दे दो, ज़िंदगी ताउम्र ब्याज समेत आपको सुख ही सुख परोसेगी।
पर जिसने जवानी के दस साल ज़िंदगी को देने से इन्कार किया, आलस और अमन-चमन में उड़ा दिए उसकी पूरी ज़िंदगी अंधेरों में कटेगी। उम्र के बीस से तीस साल के बीच की अवधि पढ़ाई और संघर्ष मांगती है, जी जान से अपना लक्ष्य तय करते जूट जाओ सफ़लता स्वागत करेगी।
समझो पढ़ लिखकर मेहनत से डिग्री का बीज बोओगे तभी तो सफ़लता का फल पाओगे, और बीज को पनपकर पेड़ बनने में और फल देने में दस साल की मेहनत तो लगती ही है इसलिए दस बस, फिर तो दो हाथ और एक दिमाग के दम पर आराम से बैठे-बैठे फल खाओ total preparation it will be win so युवाओं किसी भी परिस्थिति से डरो मत, अपना बेस्ट देने की कोशिश करो और ज़िंदगी की हर चुनौतियों को मात देते आगे बढ़ो। खुद पर विश्वास जीत की पहली शर्त है। remember You can do anything..

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

Related Posts

अमेरिका का बयान – दुनिया हैरान | America’s statement – the world was shocked

December 12, 2022

भारत अब अमेरिका का सिर्फ़ सहयोगी नहीं बल्कि तेज़ी से उभरती हुई विश्व की महाशक्ति है भारत तरक्की की बुलंदियों

कामकाजी महिला से रत्ती भर कमतर नहीं गृहिणी | housewife is not an iota less than a working woman.

December 11, 2022

“कहते है लोग वक्त ही वक्त है उसके पास, खा-पीकर टीवी ही देखती रहती है कहाँ कोई काम खास, करीब

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है?

December 10, 2022

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है? हमारे

वाइब्रेंट बॉर्डर – विलेज़ टूरिज्म – टूरिज्म डेस्टिनेशन | vibrant border-Village tourism- tourism destination

December 10, 2022

 यह आर्टिकल वाइब्रेट बॉर्डर विलेज टूरिज्म-टूरिज्म डेस्टिनेशन। भारत की जी-20 अध्यक्षता देश के प्रत्येक हिस्से की विशिष्टताओं को दुनिया के

नानक दुखिया सब संसार | nanak dukhiya sab sansar

December 10, 2022

यह आर्टिकल,आओ जीवन में अच्छे बुरे दोनों दिनों का शुक्राना अदा करें।जीवन के हर बीते हुए दिन का शुक्राना अदा

मूलभूत साक्षरता में सामुदायिक जुड़ाव और माता-पिता की भागीदारी

November 28, 2022

 मूलभूत साक्षरता में सामुदायिक जुड़ाव और माता-पिता की भागीदारी हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूलों के लिए सीधे फंड

PreviousNext

Leave a Comment