Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Yah sadi ki sabse nayab bimari hai by salil saroj

यह सदी की सबसे नायाब बीमारी है बहरों से बातचीत की कोशिश जारी हैयह सदी की सबसे नायाब बीमारी है …


यह सदी की सबसे नायाब बीमारी है

Yah sadi ki sabse nayab bimari hai by salil saroj

बहरों से बातचीत की कोशिश जारी है
यह सदी की सबसे नायाब बीमारी है

सब कुछ कर के भी हम कुछ नहीं करते
जो कुछ नहीं करते , वो सब सत्ता धारी हैं

शक्लें बदलने से शरीर नहीं बदला करते
तो भी गाँवों को शहर बनाने की तैयारी है

सरकार तमगे लगाए फिरती है सीने पे
जबकि मुल्क में भूख अब भी महामारी है

रोटी,कपड़ा,मकाँ मिलके भी नहीं मिलता
क्या करे जनता,योजनाएँ सब सरकारी हैं

हमें मालूम है कि क्या हश्र होना है हमारा
पर क्या करें, हमें भी वतन की खुमारी है

सलिल सरोज

दिल्ली


Related Posts

जरूरत है जागरूक बनने की- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

जरूरत है जागरूक बनने की देखकर उन्हें आनी चाहिएआम जनता में सुरक्षित होने की भावना,निकल जाना चाहिए डर मन सेगुण्डों,

सहनशीलता- सुधीर श्रीवास्तव

December 3, 2021

 सहनशीलता कैसा जमाना आ गया है ज्यों ज्यों शिक्षा का स्तर बढ़ रहा हैहम विकास की ओर बढ़ रहे हैं,हमारी

देश का दुर्भाग्य- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

 देश का दुर्भाग्य कृषि के लिए नीतियां बनाने मेंकृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने मेंशिक्षक का प्रतिनिधित्व

क्या हमनें पा लिया है?- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

क्या हमनें पा लिया है? वक्त गुजरने के साथसरल शिक्षाओं कोरूढ़ करके सदियों के लिएजटिल हमनें बना लिया है, महापुरुषों

सच्चाई सामने जरूर आएगी-जितेन्द्र ‘कबीर’

November 30, 2021

सच्चाई सामने जरूर आएगी नुकसान होगा,सोचकर जो तुमनेकदम खींच लिए अपनेसच्चाई की राह सेतो आस्था तुम्हारी सच्चाई परकभी सच्ची न

संविधान दिवस विशेष- सुधीर श्रीवास्तव

November 30, 2021

 व्यंग्य संविधान दिवस आइए ! मौका भी है दस्तूर भी हैहमारे मन भरा फितूर जो है,आज भी हमसंविधान संविधान खेलते

Leave a Comment