Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Yadon ka sahara by hare Krishna Mishra

 यादों का सहारा अपराधी मैं तेरा हूं , सजा चाहे जो भी दो, नहीं शिकवा नहीं गिला, आंशू तो हमारे …


 यादों का सहारा

Yadon ka sahara by  hare Krishna Mishra

अपराधी मैं तेरा हूं ,

सजा चाहे जो भी दो,

नहीं शिकवा नहीं गिला,

आंशू तो हमारे हैं ,

न बाटेंगे दर्द अपने,

बहुत विश्वास इस पर है,

खरा सोना अगर कोई,

कुंदन तो हमारा है  ।।

गाए जा तू गीतों को,

रचना तो तुम्हारी है ,

गाया है तुम्हें हरक्षण ,

जीवन भर निभाएंगे,

मेरे प्रीतम मुझे भी गा,

यही तो कहती आई हो,

सुनाऊंगा तुम्हें हरदम

तेरी इच्छा हमारी है  ।।

देखो अब लिखूंगा क्या,

बचा भी क्या है जीवन में,

शब्दों की कमी भी है,

ध्वनि तो गौण मेरा है ,

बना उपक्रम मेरा है ,

तेरे पास पहुंचने का ,

कैसा प्रयास मेरा है ,

रोने का बहाना है   ।।

खोने का बहुत गम है,

पाना भी तो दुर्लभ है ,

रचनाएं तो अधूरी हैं ,

पूरा अब करेगा कौन ,?

रोने का भी मेरा क्या ,

कलम मेरी भी रोती है ,

दुख में भी क्या हंसना ,

दिखावा ही दिखावा है।   ।।

खुशी जीवन में है कितनी ,

विद्वानों का विश्लेषण है ,

यह तो एक कोरामिन है ,

दुखों में गम भुलाने का ,

महादेवी के शब्दों में ,

दुख ही दुख है जीवन में ,

दुख में ही तो ईश्वर है ,

दर्द में ही तो दर्शन है  ।।

करूं अर्पण समर्पण भी ,

यही मर्जी तो उसकी है ,

गीता सार का दर्शन ,

सुख-दुख को तो आना है,

तुम्हारा भी जो सपना था ,

जुड़ा था मैं वहीं तुमसे  ,

विकल व्याकुल बहुत अब हूं,

यादों का सहारा है।   ।।

       मौलिक कृति

                         डॉ हरे कृष्ण मिश्र

                         बोकारो स्टील सिटी

                         झारखंड ।


Related Posts

गुंजा के दाने

October 1, 2022

गुंजा के दाने रमणीय , मनमोहक , चमकदारगुंजा के दाने मन को हर जाते हैसुर्ख चटकीले लाल रंग लिये येकाले

गांधीजी के सिद्धांत व विचार

October 1, 2022

2 अक्टूबर 2022 महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष में उनके सिद्धांतों और विचारों पर मौलिक रचना कविता –गांधीजी के सिद्धांत

Phir Wahi Qissa Sunana To Chahiye

October 1, 2022

 Phir Wahi Qissa Sunana To Chahiye फिर वही क़िस्सा सुनाना तो चाहिए फिर वही सपना सजाना तो चाहिए यूँ मशक़्क़त

मुझे कहां पता था

October 1, 2022

मुझे कहां पता था आरज़ू थी तेरे संग जिंदगी बिताऊंगीआरज़ू थी तेरा साथ अंत तक मैं निभाऊंगी।। मेरी आरज़ूओं को

Gawaai Zindagi Jakar Bachhaani Chahiye Thi

October 1, 2022

Gawaai Zindagi Jakar Bachhaani Chahiye Thi गँवाई ज़िंदगी जाकर बचानी चाहिए थीबुढ़ापे के लिए मुझको जवानी चाहिए थी समंदर भी

हदें

September 28, 2022

हदें शान हैं उसी में इंसान अपनी हद में रहेंजब छोड़ हद न समंदर न ही नदी बहेँइंसान ही हद

PreviousNext

Leave a Comment