Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Vridh Divas budhapo by mainudeen kohri

 वृध्द दिवस  बुढ़ापो         बुढापो  तो  सगलां  नैं आसी । ओ’ बुढापो  तो  घणो  दोरो रे ।। …


 वृध्द दिवस
  बुढ़ापो

       

Vridh Divas by mainudeen kohri

बुढापो  तो  सगलां  नैं आसी ।

ओ’ बुढापो  तो  घणो  दोरो रे ।।

अंग  सगळा  तो उतर  दे देवै।

उठणो – बैठणो  घणो  दोरो रे ।।

सरदी-गरमी हुवै चाहे चौमासा ।

जीवण  तो जीणो घणो दोरो रे।।

छोटी-मोटी बीमारय्यां री लाचारी ।

बुढापो में तो जीणो नीं सोरो  रे ।।

ओ ‘ बुढापो तो सगळा नै आणो ।

बुढापै सूं सीख नीं ली तो दोरो रे ।।

मां-बाप,बुजुर्गा री चाकरी करलो ।

थांरो बुढापो भी  हुंवसी  सोरो रे ।।

 मईनुदीन कोहरी
             “नाचीज बीकानेरी”


Related Posts

जीवनपथ – भारती चौधरी

November 7, 2021

 जीवनपथ उठा तर्जनी परप्राणी पर छिपा निज दुर्गुण किस पंथ रखा तनिक विचार किया स्वयं पर निज दायित्व किस स्कंध

बादल – चन्दा नीता रावत

November 7, 2021

 ।।   बादल  ।। !! बादल तेरी   अनोखी कहानी  कभी चंचल कभी मनमानी कभी सतरंगी रूप निराली  नयन सुख मिल जानी

Barood par masoom by Anita sharma

November 7, 2021

बारूद पर मासूम नियति की गति बड़ी निराली देख अचरच होता है। खतरे का न इल्म इन्हें तो बारूद पर

गोधन – डॉ.इन्दु कुमारी

November 7, 2021

 गोधन गोबर की यम मूर्ति बनाई प्यार से इनको सजाई दीर्घायु  की  दुआ  माँगी भाई जियो लाख बरीश हमें  दे

कविता : न देना दिल किसी को -सरस्वती मल्लिक

November 7, 2021

 कविता : न देना दिल किसी को  न देना दिल किसी को , न लगाना दिल किसी से ,  छीन

जीवन दरिया है – डॉ.इन्दु कुमारी

November 7, 2021

 जीवन दरिया है जीवन है एक दरियाअविरल बहती जाए सुख-दुख की बेलियाबस सहती ही जाएधैर्य की सीपियांमोती बनाता है संकट

Leave a Comment