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Vridh Divas budhapo by mainudeen kohri

 वृध्द दिवस  बुढ़ापो         बुढापो  तो  सगलां  नैं आसी । ओ’ बुढापो  तो  घणो  दोरो रे ।। …


 वृध्द दिवस
  बुढ़ापो

       

Vridh Divas by mainudeen kohri

बुढापो  तो  सगलां  नैं आसी ।

ओ’ बुढापो  तो  घणो  दोरो रे ।।

अंग  सगळा  तो उतर  दे देवै।

उठणो – बैठणो  घणो  दोरो रे ।।

सरदी-गरमी हुवै चाहे चौमासा ।

जीवण  तो जीणो घणो दोरो रे।।

छोटी-मोटी बीमारय्यां री लाचारी ।

बुढापो में तो जीणो नीं सोरो  रे ।।

ओ ‘ बुढापो तो सगळा नै आणो ।

बुढापै सूं सीख नीं ली तो दोरो रे ।।

मां-बाप,बुजुर्गा री चाकरी करलो ।

थांरो बुढापो भी  हुंवसी  सोरो रे ।।

 मईनुदीन कोहरी
             “नाचीज बीकानेरी”


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