Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Vishwa Dak Divas per Vishesh by Sudhir Srivastava

 विश्व डाक दिवस पर विशेष खतों की यादें अचानक एक दिन पुराने खत दिखे तो बीते दिनों की याद ताजा …


 विश्व डाक दिवस पर विशेष

खतों की यादें

Vishwa Dak Divas per Vishesh by Sudhir Srivastava

अचानक एक दिन

पुराने खत दिखे तो

बीते दिनों की याद ताजा हो गई,

अलमारी में कैद 

पुराने खतों की स्मृतियां 

जेहन में आ गईं।

उन पत्रों में लिखे शब्द

जाने कितने अजीजों की

स्नेह, ममता, दुलार, डांट, फटकार

नसीहत, और अपनापन

स्मृतियों में घूम गई।

अब तो खतों का जमाना 

लुप्तप्राय सा हो गया है,

आपसी भावनाओं का ज्वार

जैसे थम सा गया है।

अब किसी को का

इंतजार कहाँ होता?

मगर खतों सरीखा लगाव

सोशल मीडिया में नहीं होता।

अब तो अलमारी में कैद

खत यादगार बनें हैं

निशानी बनकर 

अलमारी में कैद हैं,

अब तो सिर्फ़ 

महसूस किया जा सकता है

खतों का इंतजार 

किया होगा जिसनें

वो ही समझ सकता है,

आँखों की भीगी कोरों के साथ

खतों में छिपे अहसास को

सच में समझ सकता है।

★ सुधीर श्रीवास्तव

       गोण्डा(उ.प्र.)

    8115285921

©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

Kavita – antim iccha | अंतिम इच्छा

December 30, 2023

अंतिम इच्छा सुनो दिकु… बस एक अंतिम इच्छा हैतुम से मुलाकात करने कीमेरे जीवन में तुम्हारा जो महत्त्व है उसपर

कविता-सूखा पेड़ | sukha ped

December 30, 2023

कविता-सूखा पेड़ सूखे पेड़ को भी हराभरा होने की आश हैजैसे किसी प्यासे को पानी की प्यास हैदूसरे हरेभरे वृक्ष

कविता – तितली | kavita Titli

November 26, 2023

कविता :तितली | kavita – Titli  आसमान है रंग-बिरंगीरातों की झिलमिल-झिलमिलऔ तारों की चमक सुनहलीतितली के पंखों – सी उड़ी

कविता –औरत संघर्ष

November 14, 2023

कविता –औरत संघर्ष मेरी दोस्त! जब मैंने तुम्हें पढा़,तब मुझे एक जीवंत स्त्रीत्व का बीता हुआ कल स्मरण हो आया..राजनीतिक

कविता: दिवाली | kavita Diwali

November 13, 2023

कविता: दिवाली सुनो दिकु…अंतर्मन का अँधेरा मिट जाएगातुम्हारे आने से दिल का दीप जल जाएगा धरा होगी नर्म-सी शीतलइश्क में

देश की राजनीति और राजनीति का देश

November 12, 2023

“देश की राजनीति & राजनीति का देश “ सचमुच! यह तो ‘भारत’ हैभारत! हाँ, वही भारत, जहाँ चाणक्य थे। चाणक्य?

PreviousNext

Leave a Comment