Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Vijaydashmi aur Neelkanth by Sudhir Srivastava

विजयदशमी और नीलकंठ हमारे बाबा महाबीर प्रसाद  हमें अपने साथ ले जाकर विजय दशमी पर हमें बताया करते थे नीलकंठ …


विजयदशमी और नीलकंठ

Vijaydashmi aur Neelkanth by Sudhir Srivastava

हमारे बाबा महाबीर प्रसाद 

हमें अपने साथ ले जाकर

विजय दशमी पर

हमें बताया करते थे

नीलकंठ पक्षी के दर्शन भी कराते थे,

समुद्र मंथन से निकले

विष का पान भोले शंकर ने किया था

इसीलिए कंठ उनका नीला पड़ गया था

तब से वे नीलकंठ भी कहलाने लगे।

शायद तभी से विजयदशमी पर

नीलकंठ पक्षी के दर्शन की

परंपरा बन गई,

शुभता के विचार के साथ

नीलकंठ में भोलेनाथ की

मूर्ति लोगों में घर कर गई।

इसीलिए विजयदशमी के दिन

नीलकंठ पक्षी देखना 

शुभ माना जाता है,

नीलकंठ तो बस एक बहाना है

असल में भोलेनाथ के 

नीले कंठ का दर्शन पाना है

अपना जीवन धन्य बनाना है।

मगर अफसोस अब 

बाबा महाबीर भी नहीं रहे,

हमारी कारस्तानियों से 

नीलकंठ भी जैसे रुठ गये

हमारी आधुनिकता से जैसे

वे भी खीझ से गये,

या फिर तकनीक के बढ़ते 

दुष्प्रभाव की भेंट चढ़ते गये।

अब न तो नीलकंठ दर्शन की

हममें उत्सुकता रही,

न ही बाग, जंगल, पेड़ पौधों की

उतनी संख्या रही

जहां नीलकंठ का बसेरा हो।

तब भला नीलकंठ को कहाँ खोजे?

पुरातन परंपराएं भला कैसे निभाएं?

पुरातन परंपराएं हमें

दकियानूसी लगती हैं

तभी तो हमनें खुद ही

नील के कंठ घोंट रहे हैं,

बची खुची परंपरा को

किताबों और सोशल मीडिया के सहारे

जैसे तैसे ढो रहे हैं,

नीलकंठ दर्शन की औपचारिकता

आखिर निभा तो रहे हैं

पूर्वजों के दिखाए मार्ग पर चल रहे हैं,

आवरण ओढ़कर ही सही 

विजयदशमी भी मना रहे हैं।

✍ सुधीर श्रीवास्तव
        गोण्डा, उ.प्र.,भारत
     8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

खुशियों की बहार-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

खुशियों की बहार! लाए खुशियों की बहार, चाहे परेशानियां हो हजार,जिंदगी तो है कुछ पलों की,लड़े कैसा भी हो प्रहार!

देशभक्ति २१ वी सदी में-सतीश लाखोटिया

January 24, 2022

देशभक्ति २१ वी सदी में वतन पर क्या गाऊँ मैंदेशभक्ति के गीतहम माटी के पुतलेभूल गए उन शहीदो कीदेश पर

मकर संक्रान्ति का महत्व

January 17, 2022

मकर संक्रान्ति का महत्व  हिंदू धर्म ने माह कोदो पक्षों में बाँटा गया हैकृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष,वर्ष को भी

संक्रांति -डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

संक्रांति ! चलो हम सब मिलकर बनाते हैं मकर संक्रांति, सर्दियों में आलस्य में जकड़ा, शरीर पकड़े थोड़ी सी गति,भागदौड़,

सर्दी का मौसम-डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

सर्दी का मौसम! दिसंबर के महीने से पड़ती, सबसे ठंडी रितु सर्दी,जैकेट, ऊनी कपड़े पहनते सब,ओले, तेज हवा और पड़ती

लोहड़ी का पर्व- डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

लोहड़ी का पर्व! फसल की कटाई और बुआई के तौर पर मनाया जाता है यह त्योहार,सब नए नए वस्त्र पहनकर,

Leave a Comment