Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Vijay divash kavita by Sudhir Srivastava

 विजय दिवस बहुत गर्व है हमें अपने जाँबाजों,रणबांकुरों पर जिनके हृदय में हिंदुस्तान बसता है, जिनका हौसला चट्टान सा शरीर …


 विजय दिवस

Vijay divash by Sudhir Srivastava

बहुत गर्व है हमें

अपने जाँबाजों,रणबांकुरों पर

जिनके हृदय में हिंदुस्तान बसता है,

जिनका हौसला चट्टान सा

शरीर फौलाद सा

आत्मविश्वास हिमालय सा

और दुश्मनों के लिए

आँखों में अंगार जलता है।

आज विजय दिवस पर

हमारा अश्रुपूरित नमन है,

हमारे बाप भाई बेटे जो

माँ भारती की आन के लिए

शहीद हो दुनिया से विदा हो गये,

हमने उन्हें खोया जरूर है

मगर वे आज भी 

हमारे दिलों में जिंदा हैं,

हमारा सीना फख्र से ऊँचा है

मगर एक कसक भी है,

इसीलिए आँखों में आँसू भी है।

हमने अपने जिगर के टुकड़ों को

दुश्मन के कुचक्र से खो दिया,

वो तो नीच पापी बेहया है,

मगर हमारी गंदी राजनीति में भी

कितनी हया है?

उन्हीं पर ऊँगलियाँ भी उठाते हैं,

जिनकी बदौलत सुख चैन

और राजनीति में अवसर भी बनाते हैं।

आज भी बहुत से ऐसे हैं

जो घड़ियाली आँसू बहाते

औपचारिकता के पुष्प चढ़ा

श्रद्धासुमन अर्पित करने में

सबसे आगे होंगे।

फिर भी हमें गर्व है

अपने उन जाँबाजों पर

जो ऐसे बेशर्मों की बेहयाई पर

ऊपर बैठे मुस्कुरा रहे होंगे,

हमारी दिल से श्रद्धांजलि 

बड़े गर्व से स्वीकार कर रहे होंगे।

■ सुधीर श्रीवास्तव

      गोण्डा, उ.प्र.

    8115285921

©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

मैं मणिपुर हूं | main Manipur hun kavita

August 11, 2023

मैं मणिपुर हूं सुन सको तो सुनो, दिल को मजबूत कर, दास्तां अपने ग़म की बताता हूं मैं,मैं मणिपुर हूं,

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई

August 11, 2023

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई दर्द-ए चीख मेरी, मेरे ही भीतर तोड़ मुझे घुटके रह गईनकाब हंसी

Munshi premchandra par kavita |प्रेमचंद

July 31, 2023

प्रेमचंद Munshi premchandra एक ख़्वाहिश है, कि कभी जो तुम एक दोस्त बनकर मिलो,तो कुल्हड़ में चाय लेकर,तुम्हारे साथ सुबह

सात सुरों से भर दो | saat suron se bhar do kavita

July 28, 2023

सात सुरों से भर दो सात सुरों से भर दो बेरंग सी हुई मेरी दर्द-ए जिंदगी में, रंग भर दो

नव वसंत | Nav basant by priti Chaudhary

July 24, 2023

नव वसंत नव वसंत तुम लेकर आना, पतझर सा है यह जीवन। सूख चुकी है सब शाखाएँ, झरते नित ही

कविता -जीभ|ज़बान | kavita :jeebh | jaban

July 21, 2023

कविता -जीभ|ज़बान | kavita:jeebh | jaban आवाज़ की तेरे मैं साथी,स्वाद से कराती तेरी पहचान।चाहे हो भोजन या फिर रिश्ते,मेरा

PreviousNext

Leave a Comment