Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Vijay abhi tak apurn hai by Jitendra Kabir

 विजय अभी तक अपूर्ण है हजारों वर्ष पूर्व भगवान राम की पापी रावण को मारकर प्राप्त की गई विजय अभी …


 विजय अभी तक अपूर्ण है

Vijay abhi tak apurn hai by Jitendra Kabir

हजारों वर्ष पूर्व

भगवान राम की पापी रावण को

मारकर प्राप्त की गई

विजय अभी तक अपूर्ण है,

उसकी याद में साल दर साल

मनाया जाने वाला 

यह जश्न एक दिखावा भर है,

दूध पीती मासूम बच्चियों से लेकर

वृद्ध स्त्रियों तक को जिस देश में

आज भी आए दिन 

बलात्कार का शिकार होना पड़ता हो,

हजारों नाबालिग बच्चियों को

जहां हर साल धकेल दिया जाता हो

देह की मंडियों में रोजाना बोली

लगाए जाने के लिए,

‘मैरिटल रेप’ के बारे में

जहां का कानून अब तक 

औपनिवेशिक मानसिकता से

आगे न बढ़ पाया हो,

अपनी बेटियों को पढ़ाई और

नौकरी करने के लिए 

बाहर भेजने से पहले मां-बाप को

जहां सौ बार उसकी सुरक्षा के बारे में

सोचना पड़े,

उस देश में सिर्फ एक देवी सीता के

अपहरण के दोषी 

रावण की मौत का जश्न,

बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न,

असत्य पर सत्य की जीत का जश्न,

बुरी नीयत पर अच्छी नीयत 

की जीत का जश्न

सब कुछ अधूरा है और तब तक रहेगा

जब तक इस देश का हर पुरुष

इस देश की हर एक स्त्री को 

सम्मान की नजर से नहीं देखता।

                              जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

आया है नवरात्रि का त्योहार

October 16, 2023

आया है नवरात्रि का त्योहार आया है नवरात्रि का त्योहार।नवरात्रि में माँ का सजेगा दरबार।गली-गली गूँजेंगे भजन कीर्तन,माँ अंबे की

कविता – अश्रु | kavita – Ashru

October 14, 2023

कविता – अश्रु ये आसू नही मेरा क्रोध है,क्यू तुम्हे नही ये बोध है,कमजोर मत समझो तुम मुझे,यह तुम पर

कविता -अभिव्यक्ति का अंतस्

October 14, 2023

अभिव्यक्ति का अंतस् आहूत हो रही हैभाव की अंगडा़ईमन की खामोश और गुमसुम परछाई मेंकि कहीं कोई चेहरा… चेहरे की

मां है घर आई

October 14, 2023

मां है घर आई मां है घर आई चहुं दिग खुशियां छाईं झूम उठा है कण-कण माटी का हर चेहरे

कविता – बस आ जाओ

October 14, 2023

कविता  : बस आ जाओ सुनो दिकु….. मुज़ से कोई खता हुई है, तो बता दो ना रुख से अपने

ये अंधेरी रात| kavita: ye Andheri rat by veena adavani

October 9, 2023

ये अंधेरी रात ये तंहाई भरी अंधेरीगहरी काली रातहमे डराते हैं।। ये उमड़े घुमड़ते बादलदेख हम अक्सर कितनाडर जाते हैं।।

PreviousNext

Leave a Comment