Vigyan par kavita | vigyan ne samay bachaya
कविता-विज्ञान ने समय बचाया विज्ञान ने समय बचाया दबाया बटन काम हो जाए छोड़ पैदल,साइकिल,गाड़ी,हमें आसमान में उड़ना सिखाया यह …
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व्यंग्य कविता–मैं भ्रष्टाचारी कहलाता हूं| Mai bhrastachari kehlata hun
December 10, 2022
यह कविता भ्रष्टाचार पर व्यंग्यात्मक कुटिल कटाक्ष है।जिसका परिणाम बच्चों बीवी मां सहित परिवार की बीमारी से निकलता है।जिसका संज्ञान
अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है| absent rahta hun par haziri lagti hai
December 10, 2022
यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय ऑफिस में कर्मचारी ड्यूटी पर होकर भी राउंड के बहाने कैसे घूमते फिरते, बाहरगांव जाते, ऑफिस
व्यंग्य कविता-अभी-अभी भ्रष्टाचार केस में सस्पेंड हुआ हूं| abhi abhi bhrastachar case me suspend hua hun
December 10, 2022
यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार में सस्पेंड होने के बाद फ़िर हरे गुलाबी के दम पर वापिस पदासीन होने और मिलीभगत
व्यंग्य कविता-नियमों कानूनों की धौंस बताता हूं niyamo kanoono ki dhaus batata hun
December 10, 2022
यह व्यंग्यात्मक कविता हर शासकीय कार्यालय में लटकाने, भटकाने और माल चटकाने की प्रथा पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष पर आधारित है
व्यंग्य कविता-क्योंकि मैं शासन का जँवाई राजा हूं| kyuki Mai shashan ka jawai raja hun
December 10, 2022
यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय कर्मचारियों का शासन पद चेयर में अभूतपूर्व सम्मान हरे गुलाबी की बारिश जनता पर ठस्का समाज
मैंने भी भूमि संपादन की मलाई खाई| maine bhi bhumi sampadan ki malai khai
December 10, 2022
यह व्यंग्यात्मक कविता भूसंपादन की स्थिति में सामान्य पड़ित ज़मीन को ओलित सिंचित या एनए करवाकर डबल से दस गुना

