Vigyan par kavita | vigyan ne samay bachaya
कविता-विज्ञान ने समय बचाया विज्ञान ने समय बचाया दबाया बटन काम हो जाए छोड़ पैदल,साइकिल,गाड़ी,हमें आसमान में उड़ना सिखाया यह …
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नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
March 4, 2023
भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो अटके काम बनाना है तो
नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है
March 4, 2023
भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने
धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं
March 4, 2023
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा
शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं
March 4, 2023
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं पद और कुर्सी से बेवफाई किया हूं मैंने
मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है
March 4, 2023
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है उसको बहुत सफ़लता मिलती है तो उसपर मां लक्ष्मी की कृपा
क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है
March 4, 2023
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है मेरी कामयाबी से चारों और खुशी मच रही है

